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लोकपाल बिल पर ना समझों का हंगामा .............

शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

जी हाँ दोस्तों लोकपाल बिल पर अन्ना जेसे लोग और उनके समर्थकों का भरी हंगामा , भरी दबाव, भारी आन्दोलन जेसे किया जा रहा है उससे ऐसा लगता है जेसे अगर अन्ना का लोकपाल आ गया तो देश में राम राज आ जाएगा ..हर भूखे को रोटी , हर नंगे को कपड़ा और पीड़ित को न्याय मिल जाएगा ..लेकिन दोस्तों ऐसा कुछ भी नहीं है ..लोकपाल केवल सरकार की तनख्वाह और भत्ते प्राप्त करने वाला ऐसी कठपुतली होगा जो न तो किसी को सज़ा दे सकेगा और ना ही किसी के बारे में कुछ कह सकेगा .कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का हमारे सामने प्रमुख उदाहरण हैं ...अभी लोकपाल के अन्ना और सरकार की लड़ाई में देश के अरबों रूपये के भ्रष्टाचार ,,घोटाले ..बढ़ी हुई कीमतों के हंगामे महंगाई के मुद्दे दफ़न हो गए हैं इन दिनों अन्ना की लड़ाई की आड़ में सरकार ने घोटालों से पर्दा उठने के बाद भी मजे किये हैं ..महंगाई निरंतर बड़ाई है ...और जनता को गुमराह करने के अलावा कोई दुसरा काम नहीं हो सका है ........अब दोस्तों लोकपाल और लोकपाल आंदलन टीम की नासमझी देखो इसमें बड़े बड़े सुप्रीमकोर्ट के वकील , चिन्तक, विचारक और समाजसेवक है लेकिन लोकपाल की जिद पर अड़े हैं जो जनता के लियें ठेंगे के समान ही होगा .चाहे लोकपाल बिल कितना ही मजबूत हो ...दोस्तों अगर अन्ना की टीम वास्तव में जनता को इन्साफ दिलाना चाहती ..भ्रष्टों को सज़ा दिलवाना चाहती तो वोह यह ना समझी का खेल नहीं करती हमारे देश में हर अपराध की सजा का प्रावधान है बस प्रभावशाली लोगों को अपराध करने के बाद भी सजा से बचाने के लियें अंग्रेजों के बनाये गए कानून के बेरियर हैं उन बेरियारों को हटा दो और देश की जनता को इन्साफ मिल जायेगा हमारे देश में सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के लियें एक कानून है बस फर्क इतना है के दंड प्रक्रिया संहिता में १९७ जोड़ दी गयी है जिसमे पाबंदी है के चोर बेईमान और भ्रष्ट कर्मचारी या अधिकारी को दंडित करवाने के लियें सरकार की स्वीक्रति की आवश्यकता है और सरकार चोर मंत्रियों ,सांसदों, अधिकारीयों , प्रधानमन्त्रियों के खिलाफ मुक़दमे की इजाज़त नहीं देती हैं नतीजन भ्रष्टाचार आज चरम सीमा पर है अगर किसी भी लोकसेवक के खिलाफ चाहे मंत्री हो चाहे प्रधानमन्त्री चाहे कर्मचारी हो चाहे संतरी भारतीय कानून के तहत मुकदमा चलाने के मामले में जो पूर्व स्वीक्रति के प्रावधान हैं वोह खत्म कर दिए जाए और आम आदमी को किसी भी मंत्री संतरी के खिलाफ मुकदमा करने का अधिकार मिल जाए तो देश से भ्रस्टाचार खुद बा खुद खत्म हो जाएगा और सभी लोग भ्रस्टाचार करने से डरेंगे आम जनता को राहत भी मिलेगी और आज़ादी के साथ दोषी लोगों को सजा दिलवाने का अधिकार भी मिलेगा ....ऐसे ही कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट का प्रावधान खत्म कर दिया जाए तो न्याय विभाग भी ईमानदार हो जायेगी और जनता के प्रति जवाबदार हो जायेगी जनता को त्वरित ,सस्ता, सुलभ और जवाबदारी वाला न्याय मिल सकेगा लेकिन कोई अन्ना कोई बाबा रामदेव इस तरफ ना तो ध्यान देगा और ना ही इस बात को लागू करवाना चाहेगा क्योंकि इससे आम जनता को अधिकार और न्याय मिल रहा है हंगामा करके मीडिया का रुख बदलना जनता की सोच महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों से हटाना नहीं है .......अप और हम सभी जानते हैं के आज तक हमारे देश में जितने भी फर्जी एन्काउंतर हुए हैं किसी मानवाधिकार आयोग ने नहीं खोले सुप्रीमकोर्ट ने ही इसमें कार्यवाही करवाई है ..जितने भी भ्रष्टाचार हुए है किसी ने भी इस मामले में कोई सबूत या शिकायत पेश नहीं की जो भी किया सुप्रीम कोर्ट के बाद किया गया है तो जनाब देश में कोर्ट की सक्रियता आज भी है ..देश के अगर सभी अयोगों के अरबों रूपये के खर्च को खत्म कर न्यायालय खोलने में लगाया जाय और मंत्री संतरी को दंड दिलवाने के लियें सभी पूर्व स्वीक्रति की बाधाएं दूर कर भ्रष्ट और अपराधियों को ना छोटा ना बड़ा के सिद्धांत पर एक आम आदमी की तर्ज़ पर मुकदमा दर्ज करवा कर सजा के प्रावधान कर दिए जाए तो जनता को खुद बा खुद न्याय मिल जाएगा और बेईमानी..भ्रष्टाचार .न्याय की खरीदफरोख्त पर अंकुश लग सकेगा क्या अन्ना जी क्या बाबा रामदेव जी क्या केजरीवाल जी क्या अग्निवेश जी यह सब कर सकेंगे ........अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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