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,,अल्लाह करे वोह कामयाब हो ,चाँद पर गए यान से टूटे सम्पर्क फिर से स्थापित हों ,हमारे देश के वेज्ञानिकों की मेहनत रंग लाये ,कामयाब हो

रविवार, 8 सितंबर 2019

जो भी आस्तिक है ,सभी जानते है ,अल्लाह की मर्ज़ी के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिल सकता ,,ईश्वर को ,भगवान को ,जीसस को जो मानते है ,वोह भी जानते है ,के ईश्वरीय शक्ति के बगैर ,एक पत्ता भी नहीं हिल सकता ,,लेकिन अगर कोई गुरुर करे ,तकब्बुर करे ,में ही इसे,,, सब कुछ कर रहा हूँ ,में ही ऐसा करूँगा ,,का उसे गुरुर हो ,,तो टूटकर बिखरता ज़रूर है ,,दोस्तों में इसरो वैज्ञानिको की गुणवत्ता पर गर्व करता हूँ ,उनकी पीठ थपथाता हूँ , अल्लाह के करम से ,भगवान की मर्ज़ी से ,इन वैज्ञानिकों ने देश में ,एक ऐसे यान को बनाकर ,चाँद पर भेजने की कामयाब कोशिश की जिसे देश ने ही नहीं ,,,विश्व ने भी देखा है ,लेकिन दोस्तों,, आखरी में अचानक ,हमारे वैज्ञानिको की इन कोशिशों पर ब्रेक लग गया ,अल्लाह से ,भगवान से दुआ है , के हमारे देश के स्वाभिमान ,अभिमान बने इन इसरो वैज्ञानिकों की कोशिश ,,हौसला असफल न हो , वोह जल्दी कामयाब हों ,अल्लाह ,भगवान ,,इस अभियान में हमे कामयाब करे ,इस अभियान में ही नहीं,, हर अभियान में ,,हमे कामयाब करे ,,,दोस्तों छोटा मुंह बढ़ी बात ,जिस देश में आस्थाओं के नाम पर वाद विवाद हो ,जिस देश में सबकी अपनी अपनी आस्थाये हो ,जिस देश के लोग ईश्वरीय शक्ति ,अल्लाह ,भगवान ,जीसस ,,वाहेगुरु की शक्ति से ही सभी कुछ अच्छा बुरा होना स्वीकार करते है ,पूजते है ,,पाठ पढ़ते है ,,नमाज़ पढ़ते है ,उस देश में इतने बढे अभियान में ,,मीडिया ने जो गुरुर ,,जो तकब्बुर दिखाया ,,मीडिया ने जो में ,,में,, करके ,ईश्वरीय शक्ति का अपमान किया ,भगवान की मर्ज़ी से ,ईश्वर की मर्ज़ी से ,,अल्लाह की मर्ज़ी से इंशाअल्लाह चाँद पर हमारी फतह होगी ,इन अल्फ़ाज़ों को हमारे मिडिया ने गायब कर ,,एक गुरुर ,एक तकब्बुर ,एक रावण सोच ,एक फिरओन की सोच ,,बताने की कोशिश की , मुझे पता नहीं इसरो के वैज्ञानिकों की तकनीक में क्या कमी रही ,,अल्लाह करे वोह कामयाब हो ,चाँद पर गए यान से टूटे सम्पर्क फिर से स्थापित हों ,हमारे देश के वेज्ञानिकों की मेहनत रंग लाये ,कामयाब हो ,,, हम विश्व के वैज्ञानिक गुरु बने ,,हमारे देश में जितनी भी आस्थाये है , इबादत घर है ,वहां दुआएं होना चाहिए मस्जिदों में इस कामयाबी के थोड़ी दूर नाकामयाब हो जाने को फिर से कमयाबी की दुआओं के साथ ,,मस्जिदों में इबादत हो ,, मंदिरों में विशिष्ठ पूजा हो ,,गिरजाघरों में जीसस से दुआ हो ,वाहे गुरु से दुआओं की दरख्वास्त हो ,पीर ,,फ़क़ीर ,क़ाज़ी ,,मुफ्ती ,,साधु ,संत ,पुजारी ,पादरी ,,गुरुग्रंथ साहिब जो भी हो सभी इस देश की कामयाबी के लिए गुरुर को ,अहंकार को एक तरफ रखकर दिल से दुआएं करे ,मीडिया के अहंकार ,,में में ,जो अललाह ,ईश्वर को हमेशा बुरा लगा है ,इस अहंकार ,इस में में ,,रावण जैसा महाज्ञानी ,,फिरओन जैसा बादशाह खत्म हो गया ,उनका अहंकार खत्म हो गया ,तो फिर मिडिया ने कैसे सोच लिया के ईश्वर ,,अल्लाह जो देश की ही नहीं विश्व की आस्थाओं की ऐसी ताक़त यही , जहाँ यह मानयता है ,ईश्वर ,अल्लाह की मर्ज़ी के बगैर कुछ भी सम्भवं नहीं तो फिर ,यह सब में में ,में में के अहंकार से कैसे सम्भव हो सकता था , जो होता है , ईश्वर , अल्लाह की मर्ज़ी से होता है ,हम लोग तो सिर्फ एक माध्यम है , अल्लाह ,ईश्वर के फैसलों को लागू करने वाले तो फिर जनाब ,यह कैसे सोच लिया के अल्लाह ईश्वर के फरमान का तिरस्कार करके हम यह कामयाबी हांसिल कर लेंगे ,लेकिन इंशा अल्लाह ,, अल्लाह के हुक्म से ,भगवान की मर्ज़ी से हम इबादत करे ,,कोशिश करे ,,दुआ करे ,, हम जहाँ भटके है ,वहीँ से फिर कामयाब होंगे ,जल्दी ही अल्लाह ,भगवान हमे अच्छी खबर देगा ऐसी दुआए ,ऐसी उम्मीद हमे रखना ही होगी ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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हमने जिन्हें पुस्तक प्रदान की है और उसे वैसे पढ़ते हैं, जैसे पढ़ना चाहिये,

121 ﴿ और हमने जिन्हें पुस्तक प्रदान की है और उसे वैसे पढ़ते हैं, जैसे पढ़ना चाहिये, वही उसपर ईमान रखते हैं और जो उसे नकारते हैं, वही क्षतिग्रस्तों में से हैं।
122 ﴿ हे बनी इस्राईल! मेरे उस पुरस्कार को याद करो, जो मैंने तुमपर किया है और ये कि तुम्हें (अपने युग के) संसार-वसियों पर प्रधानता दी थी।
123 ﴿ तथा उस दिन से डरो, जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के कुछ काम नहीं आयेगा और न उससे कोई अर्थदण्ड स्वीकार किया जायेगा और न उसे कोई अनुशंसा (सिफ़ारिश) लाभ पहुँचायेगी और न उनकी कोई सहायता की जायेगी।
124 ﴿ और (याद करो) जब इब्राहीम की उसके पालनहार ने कुछ बातों से परीक्षा ली और वह उसमें पूरा उतरा, तो उसने कहा कि मैं तुम्हें सब इन्सानों का इमाम (धर्मगुरु) बनाने वाला हूँ। (इब्राहीम ने) कहाः तथा मेरी संतान से भी। (अल्लाह ने कहाः) मेरा वचन उनके लिए नहीं, जो अत्याचारी[1] हैं।
1. आयत में अत्याचार से अभिप्रेत केवल मानव पर अत्याचार नहीं, बल्कि सत्य को नकारना तथा शिर्क करना भी अत्याचार में सम्मिलित है।
125 ﴿ और (याद करो) जब हमने इस घर (अर्थातःकाबा) को लोगों के लिए बार-बार आने का केंद्र तथा शांति स्थल निर्धारित कर दिया तथा ये आदेश दे दिया कि ‘मक़ामे इब्राहीम’ को नमाज़ का स्थान[1] बना लो तथा इब्राहीम और इस्माईल को आदेश दिया कि मेरे घर को तवाफ़ (परिक्रमा) तथा एतिकाफ़[2] करने वालों और सज्दा तथा रुकू करने वालों के लिए पवित्र रखो।
1. “मक़ामे इब्राहीम” से तात्पर्य वह पत्थर है, जिस पर खड़े हो कर उन्हों ने काबा का निर्माण किया। जिस पर उन के पदचिन्ह आज भी सुरक्षित हैं। तथा तवाफ़ के पश्चात् वहाँ दो रकअत नमाज़ पढ़नी सुन्नत है। 2. “एतिकाफ़” का अर्थ किसी मस्जिद में एकांत में हो कर अल्लाह की इबादत करना है।
126 ﴿ और (याद करो) जब इब्राहीम ने अपने पालनहार से प्रार्थना कीः हे मेरे पालनहार! इस छेत्र को शांति का नगर बना दे तथा इसके वासियों को, जो उनमें से अल्लाह और अंतिम दिन (प्रलय) पर ईमान रखे, विभिन्न प्रकार की उपज (फलों) से आजीविका प्रदान कर। (अल्लाह ने) कहाः तथा जो काफ़िर है, उसे भी मैं थोड़ा लाभ दूंगा, फिर उसे नरक की यातना की ओर बाध्य कर दूँगा और वह बहुत बुरा स्थान है।
127 ﴿ और (याद करो) जब इब्राहीम और इस्माईल इस घर की नींव ऊँची कर रहे थे तथा प्रार्थना कर रहे थेः हे हमारे पालनहार! हमसे ये सेवा स्वीकार कर ले। तू ही सब कुछ सुनता और जानता है।
128 ﴿ हे हमारे पालनहार! हम दोनों को अपना आज्ञाकारी बना तथा हमारी संतान से एक ऐसा समुदाय बना दे, जो तेरा आज्ञाकारी हो और हमें हमारे (हज्ज की) विधियाँ बता दे तथा हमें क्षमा कर। वास्तव में, तू अति क्षमी, दयावान् है।
129 ﴿ हे हमारे पालनहार! उनके बीच उन्हीं में से एक रसूल भेज, जो उन्हें तेरी आयतें सुनाये और उन्हें पुस्तक (क़ुर्आन) तथा ह़िक्मत (सुन्नत) की शिक्षा दे और उन्हें शुध्द तथा आज्ञाकारी बना दे। वास्तव में, तू ही प्रभुत्वशाली तत्वज्ञ[1] है।
1. यह इब्राहीम तथा इस्माईल अलैहिमस्सलाम की प्रार्थना का अंत है। एकरसूल से अभिप्रेत मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं। क्यों कि इस्माईल अलैहिस्सलाम की संतान में आप के सिवा कोई दूसरा रसूल नहीं हुआ। ह़दीस में है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः मैं अपने पिता इब्राहीम की प्रार्थना, ईसा की शुभ सूचना, तथा अपनी माता का स्वप्न हूँ। आप की माता आमिना ने गर्भ अवस्था में एक स्वप्न देखा कि मुझ से एक प्रकाश निकला, जिस से शाम (देश) के भवन प्रकाशमान हो गये। (देखियेः ह़ाकिमः2600) इस को उन्हों ने सह़ीह़ कहा है। और इमान ज़हबी ने इस की पुष्टि की है।
130 ﴿ तथा कौन होगा, जो ईब्राहीम के धर्म से विमुख हो जाये, परन्तु वही जो स्वयं को मूर्ख बना ले? जबकि हमने उसे संसार में चुन[1] लिया तथा आख़िरत (परलोक) में उसकी गणना सदाचारियों में होगी।
1. अर्थात मार्गदर्शन देने तथा नबी बनाने के लिये निर्वाचित कर लिया।

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कार्टून :- राजनीति‍ का पकड़ौआ सि‍द्धांत


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तबाही को आमंत्रित करती सभ्यता

शनिवार, 7 सितंबर 2019




दिनांक 060919

यह सभ्यता उन गलतियों की वज़ह से तबाह हो रही है जो हम जानबूझकर करते हैं...
तारीख़ बदल गयी है लेकिन मंजर वही है... अँधेरी रात और घनघोर वर्षा में डूबता जगदलपुर शहर । रात के दो बज रहे हैं अचानक कुछ गिरने की आवाज़ से नींद खुली तो देखा कमरे में पानी भरा हुआ है।
हमारा घर जगदलपुर के पॉश इलाके में है जहाँ एन.एम.डी.सी. के अधिकारियों से लेकर आई.जी. और कमिश्नर जैसे बड़े-बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी रहते हैं। इसी साल जुलाई में भी यह शहर इसी तरह पानी में डूबा था किंतु सबक नहीं लिए जाने की परम्परा को निभाते हुए कोई सबक नहीं लिया गया । इस बार स्थिति ज़्यादा ही गम्भीर है।
विज्ञान एक ऐसा दैत्य है जिसे सम्हालना बहुत मुश्किल है । तबाही के दिन हमारी कोई भी उन्नत तकनीक किसी को भी बचा नहीं सकेगी ।  वह एक ऐसी घड़ी होगी जब कुछ भी हमारे पक्ष में नहीं होगा - न पद ...न पैसा

डायल 112...
पानी घरों के अंदर घुस चुका है, सारा सामान भीग रहा है। रात के ढाई बजे मैंने डायल 112 को फ़ोन करके सहायता की याचना करनी चाही। उधर से कहा गया कि आवाज़ नहीं सुनाई दे रही है, बी.एस.एन.एल की सेवा से हम बहुत अच्छी तरह परिचित हैं। हमने दोबारा और तिबारा फोन लगाया ...उधर से वही आवाज़...”आपकी आवाज़ स्पष्ट नहीं है, कृपया दोबारा लगाएँ” । इस बार हमने दूसरे मोबाइल से सम्पर्क किया, बात हुयी, उधर से कहा गया “शीघ्र ही आपसे सम्पर्क किया जाएगा”। पिछले बार भी यही कहा गया था, वह सम्पर्क आज तक नहीं हुआ। यूँ, वारिश के अलावा अन्य मामलों में डायल 112 की सेवा तुरन्त मिल जाया करती है जिसके लिए हम छत्तीसगढ़ शासन और डायल 112 की टीम के ऋणी हैं।
डायल 112 के बाद हमने कुछ और लोगों को फ़ोन करके उन्हें इत्तला दी कि आपके घर में पानी घुस चुका है कृपया अपने ज़रूरी सामान को बचाने का प्रयास करें । जिन्हें फ़ोन किया गया उनमें तीसरे नम्बर पर एक बंदा ऐसा भी है जो पिछले पाँच साल से मेरे साथ शत्रुवत व्यवहार करता आ रहा है । कहीं पढ़ा था, आपत्तिकाल में शत्रु और मित्र का भेद समाप्त हो जाना चाहिए ।
दरअसल यह हमें भी पता है कि जब सड़क पर जाघों तक पानी बह रहा हो तो ऐसे में डायल 112 की सेवा भी क्या कर सकेगी। हमने उन्हें सुझाव दिया कि जे.सी.बी. भेज कर बाउण्ड्रीवाल के कुछ हिस्से को तोड़ दिया जाय तो पानी घरों से बाहर निकलना शुरू हो जाएगा । पिछली बार की वारिश में हमारे पड़ोसी गुड्डू ख़ान ने अपनी जे.सी.बी. मँगवाकर कुछ मलबा हटाकर सफ़ाई की थी तो पानी घरों से बाहर निकलने लगा था। इस बार गुड्डू ख़ान हैदराबाद में हैं और डायल 112 वाले जे.सी.बी. की सेवा उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं।
फ़िलहाल अब घर-घर में डल झील का आनंद प्राप्त करना हो गया आसान । बस, एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने के लिए हमें एक शिकारा बनवाना पड़ेगा । इसके बाद तो सब कश्मीर ही कश्मीर हो जायेगा ।

वरुण देवता हमसे बेहद ख़फ़ा हैं क्योंकि हमने प्रकृति के साथ बेहद बदसलूकी की है...
जगदलपुर शहर में इधर कुछ वर्षों में तेजी से कंक्रीट के जंगल खड़े किए जाते रहे हैं किंतु पानी के निकास की कहीं कोई व्यवस्था नहीं की गयी । कुछ कॉलौनीज़ तो ऐसी भी हैं जिनके चारों ओर बाउण्ड्रीवाल बनाकर किलेबंदी भी कर दी गई जिससे वारिश का पानी बाहर नहीं निकल पाता । यदि इन दीवालों को तोड़ दिया जाय तो कम से कम घरों को पानी में डूबने से बचाया जा सकता है किंतु इन बाउण्ड्रीवाल को तोड़ने में किसी अधिकारी की कोई दिलचस्पी नहीं है ।

पॉलीथिन बैग्स का अंधाधुंध दुरुपयोग और बेवकूफ़ाना ढंग से बनाये गये घर अब घरवालों के लिए मुसीबत बन चुके हैं । ऐसे ही हालातों में किसी दिन यह सभ्यता नष्ट हो जायेगी । लेकिन यह सब जानते हुये भी सुधार के बारे में कभी कोई नहीं सोचेगा । विकास और आधुनिकता का सभ्यताओं और प्रकृति के साथ यही तो तकाज़ा है ।

कामायनी...
“हिम गिरि के उत्तुंग शिखर पर बैठ शिला की शीतल छाँह...एक व्यक्ति भीगे नयनों से देख रहा था प्रबल प्रवाह” – कामायनी लिखने से पहले क्या जयशंकर प्रसाद के भी घर में घुसकर गुस्साये पानी ने कभी ऐसी ही मनमानी की होगी! 

भोर के पाँच बज रहे हैं, रात भर हुयी घनघोर वारिश कुछ कम ज़रूर हुई किंतु बंद अभी भी नहीं हुयी। हम अपनी श्रीमती जी के साथ रात भर कमरों से पानी उलीचते रहे और ज़रूरी सामान को बचाने की कोशिश करते रहे। लगातार तीन घंटे की मशक्कत के बाद हम दोनों ने घर का सारा पानी उलीच कर निकाल दिया। पानी के साथ कमरों में आकर ठहर गये गंदे कीचड़ को हमारी प्रतीक्षा है । बाहर आँगन में अभी भी जलस्तर ऊँचा है । घर के बाहर की सड़क पर पानी जाँघों तक है । पानी अब रुक-रुक कर बरस रहा है ।

नागलोक...  
पौ फटने लगी है। श्रीमती जी ने दरवाजा खोला तो देखता हूँ कि पानी में तैरता हुआ एक ज़हरीला नाग घर के अंदर घुसने की कोशिश कर रहा है। श्रीमती जी ने झट से दरवाज़ा बंद कर दिया। नाग देवता को शरण के लिए अब कहीं और जाना होगा। मैं कुछ क्षणों के लिए नाग बनकर पानी में तैरता हुआ किसी आदमी के घर में शरण पाने की उम्मीद में घुसने की कोशिश करता हूँ। घर की मालिकिन मुझे देखते ही दरवाज़ा बंद कर लेती है.. मुझे बुरा लगता है और मैं निराश हो जाता हूँ। आज मुझे कोई भी अपने घर में नहीं घुसने देगा... सनसिटी के लोग ऐसे ही हैं। कम से कम प्राकृतिक आपदा के समय तो सहयोग करना चाहिये। मैं ज़हरीला हूँ तो इसमें मेरी क्या गलती है? पिछले महीने अमेज़ॉन के जंगल में आग धधकती रही, हमारे कितने भाई-बहन और रिश्तेदार आग में ज़िंदा जलकर ख़ाक हो गए! उफ़्फ़! ये आदमी लोग ख़ुद भी तबाह होते हैं और हमें भी तबाह करते हैं।
मैं एक बार फिर दरवाज़ा खोलता हूँ ...यह देखने के लिए कि नाग देवता अभी हैं या कहीं और चले गए। हाँ! वे जा चुके हैं । भोर का उजाला थोड़ा और बढ़ गया है । काश! लोगों के दिमाग़ों तक भी यह उजाला पहुँच पाता।

बदहवास सी एक नन्हीं चिड़िया मुंडेर पर आकर इधर-उधर देख रही है । पंछियों का कलरव आज सुनायी नहीं दे रहा है । वे सब परेशान हैं और शायद मन ही मन आदमी प्रजाति को कोस रहे हैं। चिड़िया उड़ गयी, श्रीमती जी ने दरवाज़ा खुला देखा तो चीख पड़ीं ...”ज़ल्दी बंद करो बाहर पानी में साँप हैं घर में घुस जायेंगे”। मैं दरवाज़ा खुला रखना चाहता हूँ ...किंतु चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकूँगा । मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया है । छत्तीसगढ़ का यह हिस्सा नागलोक है । कभी यहाँ नागवंशी राजा हुआ करते थे। अब राजा तो नहीं रहे किंतु नाग यहाँ आज भी बहुतातायत से मिलते हैं ।

असली साम्यवाद...
नौ बजे तक सड़क का जलस्तर काफ़ी कम हो चुका था और अब हॉस्पिटल जाया जा सकता था । रास्ते में कई जगह सड़क पानी के प्रवाह से कटी हुई मिली । कल तक जो सड़क ठीक-ठाक थी आज वहाँ एक से ढाई फ़िट गहरे गड्ढे बन चुके थे और उनमें पानी भरा हुआ था । हम जैसे-तैसे हॉस्पिटल पहुँचे तो प्रवेश द्वार क्षतिग्रस्त मिला । पूरे हॉस्पिटल में गाद वाले कीचड़ का आलम था । दवाइयों वाले स्टोर रूम में कीचड़ ही कीचड़ था। ज़मीन पर रखे सारे भीगे कार्टून कीचड़ में सने हुए थे । डॉ. क्रांति मण्डावी सारे कर्मचारियों के साथ स्वयं भी सफाई अभियान में लगी हुयी थीं । वे इस समय एक मेहनतकश स्वीपर की भूमिका में थीं और ओ.पी.डी. में भर गये पानी और कीचड़ को निकाल-निकाल कर फेंक रही थीं, फ़ार्मासिस्ट लोग झाड़ू और पानी का पाइप लेकर फ़र्श साफ़ कर रहे थे । जाते ही हमने भी एक झाड़ू थाम ली । हमने अपने जीवन में यह पहला ऐसा हॉस्पिटल देखा जहाँ आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक सभी लोग मिलजुल कर बिना किसी अहं के किसी भी तरह के काम में जुट जाया करते हैं । ख़ासतौर पर सफ़ाई के समय हमने किसी भी अधिकारी या कर्मचारी में पद के अहंकार का लेश भी नहीं देखा । डॉक्टर्स की भागीदारी केवल दिखावे के लिए नहीं होती बल्कि वे भी कंधे से कंधा मिलाकर पसीना बहाते हैं । यह एक गौरवशाली परम्परा है जिसमें साम्यवाद के सिद्धांत का वास्तविकता के धरातल पर सही अनुवाद देखा जा सकता है ।

बी.एस.एन.एल. सेवाओं में स्पंदन की तलाश...

वारिश ने बी.एस.एन.एल. सेवाओं को स्पंदनहीन कर दिया । फ़िलहाल हमारा लैण्ड लाइन बिना कोई धारा समाप्त किये ही कश्मीर हो गया है, ब्रॉड बैण्ड कनेक्शन भी मृत हो चुका है। दुनिया से कटकर हम सत्तर के दशक के चाइना बन चुके हैं ...दुनिया से अलग एक अज़ूबी दुनिया के वाशिंदे ।  कहा नहीं जा सकता कि हमारी बी.एस.एन.एल. सेवायें कब तक कश्मीर या चाइना बनी रहेंगी । ज़रूरी नहीं कि सरकार ही कर्फ़्यू लगाएपवन देव, वरुण देव और अग्नि देव क्रुद्ध होने पर कभी भी कर्फ़्यू लगा सकते हैं । उनका लगाया कर्फ़्यू कोई तोड़ कर दिखाये तो भला!  

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पूरी दुनिया में हिन्दी को नयी ऊंचाई देने में सफल रही है परिकल्पना

सोमवार, 26 अगस्त 2019

लखनऊ (25 अगस्त) :  हिन्दी भाषा की विविधता, सौन्दर्य, डिजिटल और अंतराष्ट्रीय स्वरुप को विगत 14 वर्षों से वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठापित करती आ रही लखनऊ की संस्था परिकल्पना के 13वीं वार्षिक महासभा में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे लखनऊ परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपने उद्वोधन में कहा कि ‘‘परिकल्पना एक ऐसी संस्था है, जो गैर हिन्दी प्रदेशों के साथ-साथ विदेशों में हिन्दी के प्रचार प्रसार में प्रतिबद्ध है। यह संस्था हिन्दी को वैश्विकता प्रदान करने में पिछले कई वर्षों से लगातार सक्रिय है। सामाजिक संस्थाओं की उपयोगिता और आवश्यकता हर जमाने में रही है, लेकिन कुछ ही संस्थाएं अपने लक्ष्य, अपने मिशन में कामयाब हो पाती है। मुझे खुशी है कि हमारे शहर की यह संस्था वैश्विक पहचान बनाने में कामयाब रही है। मुझे यह कहते हुये गर्व का अनुभव हो रहा है कि यह संस्था हिन्दी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप देने की दिशा में बड़ा काम कर रही है। यह संस्था हिन्दी भाषा को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा हेतु विगत कई वर्षों से संघर्षरत है। यह संस्था पूरी दुनिया में हिन्दी को नयी ऊंचाई देने में सफल रही है।‘‘ 
विशिष्ट अतिथि महाराष्ट्र विश्व विद्यालय जलगांव के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ सुनील कुलकर्णी ने कहा कि ‘‘मैं हिन्दी के प्रचार, राष्ट्रभाषा के प्रचार को राष्ट्रीयता का मुख्य अंग मानता हूँ। मैंने भारत की बहुत सारी संस्थाओं को करीब से देखा है जो हिन्दी के प्रचार-प्रसार में प्रतिबद्ध है, लेकिन हमारी परिकल्पना सही मायानों में हिन्दी के उत्थान कि दिशा में अनुकरणीय भूमिका निभा रही है।‘‘ 
इस एक दिवसीय संगोष्ठी में आगत अतिथियों का स्वागत कराते हुये अवधि के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम बहादुर मिश्र ने कहा कि ‘‘जहां हिन्दी है, वहीं परिकल्पना है और जहां परिकल्पना है वहीं हिन्दी है। परिकल्पना संस्था नहीं एक वैश्विक परिवार है जो वसुधईव कुटुंबकम कि भावना को चरितार्थ करती है।‘‘ 
अपने उद्वोधन में अभिदेशक पत्रिका के संपादक डॉ ओंकार नाथ द्विवेदी ने कहा कि ‘‘परिकल्पना ने हिन्दी को पूरी दुनिया में जिस प्रकार से फैलाने का कार्य किया है वह अविस्मरणीय है। यह परिवार हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने कि दिशा में पूरी दृढ़ता के साथ सक्रिय है। यह बहुत बड़ा काम है जिसे अपने सार्थक कदमों से साधने का काम कर रहा है यह परिवार।‘‘ 
परिकल्पना समय के प्रधान संपादक डॉ रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि ‘‘परिकल्पना संस्था अबतक विश्व के 11 देशों में क्रमशः ‘‘ब्लोगोत्सव‘‘ और ‘‘अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव‘‘ का आयोजन कर चुकी है। पिछला अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव 26 मई 2019 को भारतीय महावाणिज्य दूतावास वियतनाम, वियतनाम स्थित भारतीय बीजनेस चेम्बर ऑफ कोमर्स के सहयोग से वियतनाम की आर्थिक राजधानी हो ची मिनह में मनाया गया था। भारतीय भाषाओँ के विकास और उनके वैश्विक प्रारूप को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है परिकल्पना।‘‘ 
सभाध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मिथिलेश दीक्षित ने कहा कि ‘‘परिकल्पना जिन पवित्र उद्देश्यों को लेकर काम कर रही है वह बहुत बड़ा काम है। परिकल्पना की सदस्य होने के नाते यदि मैं कहूँ कि परिकल्पना मुझमें बसती है और मैं परिकल्पना में तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।‘‘ 
भारतीय भाषाओँ के विकास और उनके वैश्विक प्रारूप को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध संस्था परिकल्पना की अध्यक्ष माला चैबे ने कहा, ‘‘यह संस्था हिन्दी भाषा और साहित्य की तकनीकी प्रगति को समर्पित है। यह संस्था एक वैश्विक परिवार है जिससे जुड़कर आप अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। यह वह मंच है जहां तुलसी के पत्ते की तरह सबको समान अवसर और सबको समान सम्मान प्रदान करती है।‘‘
इस अवसर पर परिकल्पना परिवार के संस्थापकों मे से एक स्वर्गीय अविनाश वाचस्पति की स्मृति मे श्रीमती कुसुम वर्मा को परिकल्पना के द्वारा 11 हजार रुपये नकद के साथ अविनाश वाचस्पति सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही परिकल्पना की नयी कार्यकारिणी का गठन हुआ और नए उत्तरदायित्व ग्रहण करने वाले सदस्यों को पद और गोपनियता की शपथ दिलाई गयी। 
इस अवसर पर लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता और लोकसंघर्ष पत्रिका के सलाहाकार मोहम्मद शुएब ने कहा कि "परिकल्पना से मैं भावनात्मक रूप से जुड़ा हूँ, आज मैं परिवार के बीच हूँ यह मेरे लिए गौरव की बात है। "
इसके पश्चात परिकल्पना के जानकीपुरम, लखनऊ स्थित नए परिसर का लोकार्पण भी सुनिश्चित हुआ।
संस्था के नव नियुक्त पदाधिकारियों में प्रमुख रहीं गाजियावाद से पधारीं डॉ मीनाक्षी सक्सेना कहकशां जिन्हें महिला प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान की गयी। इसके अलावा लखनऊ की डॉ मिथिलेश दीक्षित को मानद अध्यक्ष, प्रमुख समाजसेवी सत्या सिंह को उपाध्यक्ष (सामाजिक गतिविधियां), आगरा की डॉ सुषमा सिंह को उपाध्यक्ष (वैश्विक प्रसार), बाराबंकी के एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन को उपाध्यक्ष (मीडिया सह विधिक प्रभारी), वाराणसी के श्री शचिंद्रनाथ मिश्र को उपाध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ), लखनऊ की श्रीमती शीला पाण्डेय को सचिव (कार्यक्रम संयोजन), लखनऊ के श्री राजीव प्रकाश को सचिव (सेंट्रल उत्तर प्रदेश प्रभारी), मधेपुरा बिहार के डॉ अमोल रॉय को सचिव (बिहार प्रभारी), नयी दिल्ली के श्री गगन शर्मा को सचिव (दिल्ली प्रभारी), गाजियाबाद के डॉ अरुण कुमार शास्त्री को सचिव (पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी), लखनऊ की श्रीमती नीता जोशी को सचिव (महिला प्रकोष्ठ), लखनऊ कि श्रीमती कनक लता गुप्ता को सचिव (सामाजिक गतिविधियां), लखनऊ कि श्रीमती कुसुम वर्मा को सचिव (सांस्कृतिक गतिविधियां), लखनऊ के डॉ उदय प्रताप सिंह को सचिव (मीडिया प्रभारी), लखनऊ की श्रीमती आकांक्षा यादव को सह सचिव (महिला प्रकोष्ठ) और लखनऊ की श्रीमती आभा प्रकाश को सह सचिव (सांस्कृतिक गतिविधियां) का दायित्व प्रदान किया गया।
इसके अलावा श्री नकुल दुबे, डॉ सुनील कुलकर्णी, डॉ राम बहादुर मिश्र, डॉ चम्पा श्रीवास्तवतथा डॉ प्रभा गुप्ता को संस्था का संरक्षक और श्री शिव सागर शर्मा, डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी,डॉ ओम प्रकाश शुक्ल अमिय,श्री कृष्ण कुमार यादव, डॉ अनीता श्रीवास्तव और डॉ बालकृष्ण  पाण्डेय को मार्गदर्शक मण्डल में शामिल किया गया।
तत्पश्चात आगरा से पधारे कवि शिवसागर ने अपने सुमधुर आवाज़ मे कविता प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं के बीच खूब बहबही बटोरी।   मंच संचालन लोक गायिका कुसुम वर्मा ने किया।
(मीडिया रिपोर्ट: डॉ उदय प्रताप सिंह)

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आप सभी को दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं।

बुधवार, 18 अक्तूबर 2017


मन के अंधियारे को दूर भगाएं
चलो प्रेम का दीप  जलाएं

साथ चले न कोई जो तेरे
खुद को मन का साथी बना ले
असफलता से डर मत पगले
प्रयास के पथ को गले लगा ले

कोशिश की हार नही होती है
हर दिल मे ये विश्वास जगाएं
मन की अँधियारे को दूर भगाएँ
चलो प्रेम का दीप जलाएं

क्या तेरा है क्या मेरा है
ये जग दो दिन का बसेरा है
सद्कर्म किये जा पगले
हंस कर तू मिल सब से गले

मन का गुलाब सदा  ही रहे खिला
संघर्ष कांटे है उनका भी संग निभाएँ
मन के अंधियारे को दूर भगाएँ
चलो प्रेम का दीप जलाएं

बिना भाव  के मन पाषाण है
सबके कल्याण में तेरा भी कल्याण है
जहाँ भी प्रेम से मन सिंचित हो गया
धीर विश्वास भी वहीं पल्लिवत हो गया

रूठें न  कभी  भी जीवन मे अपने
भौतिक दौलत  भले ही कम हो जाये।
मन के अंधियारे को दूर भगाएँ
चलो प्रेम का दीप जलाएं



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शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

माननीय उच्चतम न्यायालय फैसला:


माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया वह आने वाले समय में भारतीय समाज के लिए दूरदर्शी परिणाम लाएगा।कानून तो पहले भी था। परंतु अब स्पष्ट हो चुका। है , कि 18 साल से कम उम्र की बालिका से यौन सम्बन्ध बनाना उसके पति  के लिए भी अपराध होगा ।
  माननीय अदालत ने इसे धर्म और मजहब के बंधन में नही बांधा है , यह निर्णय देश में समान रूप से लागू होगा तथा देश में महिलाओं  के स्वतन्त्रता सम्बन्धी अधिकारों को सुरक्षित करने में  एक नई इबारत लिखेगा। इसके फायदे  बिभिन्न क्षेत्रों में होंगे जैसे स्वास्थ के क्षेत्र जहाँ कम उम्र में अनीमिया से महिला प्रसव के दौरान मर जाती है वही  शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी।  हमारे देश व समाज मे बालविवाह  के रूप में जो सामाजिक बुराई   व्याप्त है , जिसके कारण आज भी भारत  के कई प्रान्तों में अशिक्षा के कारण गांवों में कम उम्र में ही लड़कियों की शादी उनकी मर्जी  के खिलाफ कर दी जाती है । जबकि वह आगे भी पढ़ना चाहती है। इस फैंसले से गांव हो या शहर  समाज मे एक बदलाव आने की सम्भावना है।  शिक्षा के क्षेत्र मे भी धीरे धीरे ही सही परन्तु बदलाव जरूर होगा।  छोटी लड़कियों को अपनी पढ़ाई बचपन में ही छोड़ने के लिए बाध्य नही होना पड़ेगा।सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देश का पालन शासन भी करेगा । अदालती फैसले के कारण समाज मे अब शादी के वक्त बहू लाते वक्त परिवार उसकी उम्र जरूर पूछेगा। आशा है यह फैसला आने वाले समय में महिलाओं के लिए ही नही हमारे पूरे समाज के लिये वरदान साबित होगा।

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आई आई टी कानपुर में 26 से 29 अक्तूबर तक होना है अंतराग्नि महोत्सव

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

अंतराग्नि आईआईटी कानपुर का वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव है। यह अपने प्रकार के कार्यक्रमों में संपूर्ण एशिया में सबसे उत्कृष्ट महोत्सवों की श्रेणी में आता है। अंतराग्नि ने विगत वर्षों में अपनी एक अलग पहचान कायम की है, और अपने 52 वें संस्करण में, इसकी भव्यता पहले से कहीं अधिक बड़ी और बेहतर होने जा रही है। सर्वाधिक उत्सुकता उत्पन्न करने वाले इस महोत्सव का विशाल स्तर पर आयोजन सभी में जोश और उत्साह के संचार का स्रोत है। हर वर्ष अंतराग्नि में 300 से अधिक महाविद्यालयों से लगभग 20000 प्रतिभागी शामिल होते है, जो अपने आप में इस महोत्सव की भव्यता को दर्शाता है। इस बार अंतराग्नि17 का आयोजन 26 से 29 अक्तूबर तक आई आई टी कानपुर में संपन्न होगा।
यदि आप डांस, सिंगिंग, ड्रामा, मॉडलिंग, फोटोग्राफी, क्विज आदि में रूचि रखते हैं, तो आईआईटी कानपुर में होने वाला "अंतराग्नि 2017" महोत्सव आपके लिए एक सुनहरा अवसर है। 26 से 29 अक्तूबर तक चलाने वाले इस महोत्सव में कुल 14 प्रतियोगिताएं होंगी और कुल 28 लाख के नगद इनाम प्रदान किए जाएँगे। इसमें किसी भी डिग्री कॉलेज के छत्र हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू है और इसकी अंतिम तिथि 2 अक्तूबर निर्धारित है, जो अंतराग्नि के आधिकारिक वेबसाईट www.antaragni.in  पर किए जा सकते हैं। 
जैसा कि प्रत्येक वर्ष होने वाले इस महोत्सव में देश दुनिया के हजारों छात्र-छात्राएं हिस्सा लेते हैं। वोलीवूड और अंतर्राष्ट्रीय कलाकार इसमें हिस्सा लेते हैं। यह अपने आप में अत्यंत अनूठा एवेंट्स है। डांस, सिंगिंग, ड्रामा, मॉडलिंग, फोटोग्राफी, क्विज, फाइन आर्ट्स, ड्रामाटिक्स, फिल्म एवं फोटोग्राफी आदि के अलावा इस एवेंट्स में इंगलिश और हिन्दी लिट्रेचर को भी प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। इंगलिश लिट्रेचर के अंतर्गत पोएटरी स्लेम, जैम, क्रिएटिव राइटिंग, वर्ल्ड गेम्स और पार्लियामेंट्री डिबेटस होगी जबकि हिन्दी साहित्य के अंतर्गत किरदार, काव्यांजलि, दृष्टिकोण, आमने-सामने और शब्द रंग जैसी प्रतियोगिताएं होंगी। इन प्रतियोगिताओं के अंतर्गत डांस पर कुल पाँच लाख रूपये, म्यूजिकल पर ढाई लाख, क्विज पर एक लाख, फाइन आर्ट्स पर एक लाख, ड्रामाटिक्स पर तीन लाख, फिल्म और फोटोग्राफी पर ढाई लाख तथा इंगलिश लिट्रेचर और हिन्दी साहित्य पर डेढ़-डेढ़ लाख के इनाम वितरित किए जाएँगे।

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सत्‍यमेव जयते ! ... (?): अच्‍छी बात... गंदी बात

बुधवार, 5 जुलाई 2017

हमारे देश में इंसान भले ही अनगिनत धर्मों में बंटे रहे, विपक्ष का एक ही धर्म है और वह है, विरोध

सत्‍यमेव जयते ! ... (?): अच्‍छी बात... गंदी बात:  बात ज्यादा पुरानी नहीं है। राष्ट्रऋषि सात समंदर पार देश अमेरिका गए थे। अच्छी बात है। हाल-फिल...

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मनुष्य के आंतरिक और भावनात्मक पहलू को मजबूत करता है ब्लॉग लेखन :नीरज "नैथानी"

शनिवार, 1 जुलाई 2017

जोहोर बहरू (मलेशिया ): वैश्विक स्तर पर ब्लॉगरों को एकजुट कर साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को प्राणवायु देने के उद्देश्य से संस्थापित संस्था परिकल्पना के तत्वावधान में विगत 21 जून 2017 और 25 जून 2017 के बीच सिंगापुर और मलेशिया के जोहोर बहरू तथा कुवलालम्पुर में आठवाँ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी श्रीमती सत्या सिंह "हुमैन" तथा उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार श्री नीरज कुमार "नैथानी" की गरिमामयी उपस्थिती में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे ने कहा कि आज जहां पूरा विश्व विकास और प्रगति की अंधी दौड़ में इस कदर भाग रही है कि मनुष्य का आंतरिक और भावनात्मक पहलू गौण होता जा रहा है। ऐसे में लखनऊ के एक ब्लॉगर रवीन्द्र प्रभात के द्वारा अपनों को अपनों के साथ मिलन कराने तथा भारतीय महाद्वीप की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया में फैलाने की दिशा में कार्य करना गर्व महसूस कराता है। परिकल्पना को मेरी शुभकामनायें और भारतीय ब्लॉगरों को बहुत-बहुत बधाइयाँ।
उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी श्रीमती सत्या सिंह "हुमैन" ने कहा कि मैं अभिभूत हूँ कि हमारे भारतवासी पूरी दुनिया में घूम घूमकर ब्लोगिंग के माध्यम से हिन्दी और भारतीय भाषाओं को प्रमोट कर रहे हैं। यह परंपरा बनाए रखने की जरूरत है।
इस अवसर पर परिकल्पना समय पत्रिका के मुख्य संपादक श्री रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि "ब्लॉगिंग वुद्धिजीवियों का एक प्रमुख आहार है, क्योंकि ब्लॉगिंग ने हमारे हाथ में ऐसा हथियार दिया है जिससे हम दुनिया के किसी भी कोने में पलक झपकते पहुँच सकते हैं।”
इसके अतिरिक्त, श्री हरीशंकर श्रीवास्तव शलभ द्वारा रचित पुस्तक 'सिंहेश्वर स्थानक सम्पूर्ण इतिहास' तथा श्रीमती कुसुम वर्मा की सद्य; प्रसारित ऑडियो सीडी "जय श्री हनुमान" का लोकार्पण भी माननीय श्री नकुल दुबे द्वारा सम्पन हुआ। इस अवसर पर श्री जय कृष्ण माटी एवं श्रीमती कुसुम वर्मा की मिश्रित कला प्रदर्शिनी भी आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण कला और भारतीय परंपरा का बड़ा ही मनोरम चित्र प्रस्तुत किया गया। उसके पश्चात् भारत से आये प्रसिद्ध कवियोंं ने अपनी कविताओं के माध्यम से सभा को मंत्र मुग्ध किया।
इस अवसर पर बिहार के प्रगतिशील कवि श्री अरविंद श्रीवास्तव को अविनाश वाचस्पति स्मृति परिकल्पना सम्मान से अलंकृत और विभूषित किया गया। इस विशेष सम्मान के अंतर्गत उन्हें स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और 11 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की गयी। इस अवसर पर अवधि की प्रसिद्ध लोकगायिका कुसुम वर्मा द्वारा लोकगायन और नृत्य भी प्रस्तुत किया गया।
23 जून 2017 को मलेशिया के जोहोर बहरू में योजित आठवें अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार श्री नीरज कुमार नैथानी, श्री जय कृष्ण पैन्यूली, श्री धीरेन्द्र सिंह रांगढ, रेवान्त पत्रिका की संपादक डॉ अनीता श्रीवास्तव, लोक गायिका कुसुम वर्मा, पुरातत्वविद डॉ रमाकांत कुशवाहा ‘कुशाग्र‘, शिक्षाविद डॉ विजय प्रताप श्रीवास्तव, श्री उमेश पटेल श्रीश, सचिंद्रनाथ मिश्र और अंकिता सिंह आदि भी सम्मानित किए गए।
इस अवसर पर भारतीय सभ्यता-संस्कृति को आयामित करती लोक कला प्रदर्शनी, नृत्य, गीत के साथ-साथ परिकल्पना की स्मारिका का भी लोकार्पण भी संपन्न हुआ।
परिचर्चा सत्र के दौरान अपने उद्वोधन के क्रम में ब्लॉग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर शांति-सद्भावना की तलाश विषय पर बोलते हुये श्री उमेश पटेल श्रीश ने कहा कि यही एक माध्यम है जो पूरी तरह वैश्विक है। आपके विचार चंद मिनटो में पूरी तरह वैश्विक हो जाती है और उस पर प्रतिक्रियाएँ भी आनी शुरू हो जाती है। यदि ब्लॉगर चाहे तो अपने सुदृढ़ विचारों के बल पर पूरी दुनिया में शांति-सद्भावना को स्थापित कर सकता है। आज जरूरत इसी बात की है। इस परिचर्चा में लगभग आधा दर्जन ब्लॉगरों ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ, कार्यक्रम का संचालन लखनऊ की श्रीमती कुसुम वर्मा और गोरखपुर के श्री उमेश पटेल श्रीश ने किया।
(जोहोर बहरू से सांस्कृतिक संबाददाता की रपट)

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