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आप सभी को दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं।

बुधवार, 18 अक्तूबर 2017


मन के अंधियारे को दूर भगाएं
चलो प्रेम का दीप  जलाएं

साथ चले न कोई जो तेरे
खुद को मन का साथी बना ले
असफलता से डर मत पगले
प्रयास के पथ को गले लगा ले

कोशिश की हार नही होती है
हर दिल मे ये विश्वास जगाएं
मन की अँधियारे को दूर भगाएँ
चलो प्रेम का दीप जलाएं

क्या तेरा है क्या मेरा है
ये जग दो दिन का बसेरा है
सद्कर्म किये जा पगले
हंस कर तू मिल सब से गले

मन का गुलाब सदा  ही रहे खिला
संघर्ष कांटे है उनका भी संग निभाएँ
मन के अंधियारे को दूर भगाएँ
चलो प्रेम का दीप जलाएं

बिना भाव  के मन पाषाण है
सबके कल्याण में तेरा भी कल्याण है
जहाँ भी प्रेम से मन सिंचित हो गया
धीर विश्वास भी वहीं पल्लिवत हो गया

रूठें न  कभी  भी जीवन मे अपने
भौतिक दौलत  भले ही कम हो जाये।
मन के अंधियारे को दूर भगाएँ
चलो प्रेम का दीप जलाएं



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शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

माननीय उच्चतम न्यायालय फैसला:


माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया वह आने वाले समय में भारतीय समाज के लिए दूरदर्शी परिणाम लाएगा।कानून तो पहले भी था। परंतु अब स्पष्ट हो चुका। है , कि 18 साल से कम उम्र की बालिका से यौन सम्बन्ध बनाना उसके पति  के लिए भी अपराध होगा ।
  माननीय अदालत ने इसे धर्म और मजहब के बंधन में नही बांधा है , यह निर्णय देश में समान रूप से लागू होगा तथा देश में महिलाओं  के स्वतन्त्रता सम्बन्धी अधिकारों को सुरक्षित करने में  एक नई इबारत लिखेगा। इसके फायदे  बिभिन्न क्षेत्रों में होंगे जैसे स्वास्थ के क्षेत्र जहाँ कम उम्र में अनीमिया से महिला प्रसव के दौरान मर जाती है वही  शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी।  हमारे देश व समाज मे बालविवाह  के रूप में जो सामाजिक बुराई   व्याप्त है , जिसके कारण आज भी भारत  के कई प्रान्तों में अशिक्षा के कारण गांवों में कम उम्र में ही लड़कियों की शादी उनकी मर्जी  के खिलाफ कर दी जाती है । जबकि वह आगे भी पढ़ना चाहती है। इस फैंसले से गांव हो या शहर  समाज मे एक बदलाव आने की सम्भावना है।  शिक्षा के क्षेत्र मे भी धीरे धीरे ही सही परन्तु बदलाव जरूर होगा।  छोटी लड़कियों को अपनी पढ़ाई बचपन में ही छोड़ने के लिए बाध्य नही होना पड़ेगा।सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देश का पालन शासन भी करेगा । अदालती फैसले के कारण समाज मे अब शादी के वक्त बहू लाते वक्त परिवार उसकी उम्र जरूर पूछेगा। आशा है यह फैसला आने वाले समय में महिलाओं के लिए ही नही हमारे पूरे समाज के लिये वरदान साबित होगा।

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आई आई टी कानपुर में 26 से 29 अक्तूबर तक होना है अंतराग्नि महोत्सव

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

अंतराग्नि आईआईटी कानपुर का वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव है। यह अपने प्रकार के कार्यक्रमों में संपूर्ण एशिया में सबसे उत्कृष्ट महोत्सवों की श्रेणी में आता है। अंतराग्नि ने विगत वर्षों में अपनी एक अलग पहचान कायम की है, और अपने 52 वें संस्करण में, इसकी भव्यता पहले से कहीं अधिक बड़ी और बेहतर होने जा रही है। सर्वाधिक उत्सुकता उत्पन्न करने वाले इस महोत्सव का विशाल स्तर पर आयोजन सभी में जोश और उत्साह के संचार का स्रोत है। हर वर्ष अंतराग्नि में 300 से अधिक महाविद्यालयों से लगभग 20000 प्रतिभागी शामिल होते है, जो अपने आप में इस महोत्सव की भव्यता को दर्शाता है। इस बार अंतराग्नि17 का आयोजन 26 से 29 अक्तूबर तक आई आई टी कानपुर में संपन्न होगा।
यदि आप डांस, सिंगिंग, ड्रामा, मॉडलिंग, फोटोग्राफी, क्विज आदि में रूचि रखते हैं, तो आईआईटी कानपुर में होने वाला "अंतराग्नि 2017" महोत्सव आपके लिए एक सुनहरा अवसर है। 26 से 29 अक्तूबर तक चलाने वाले इस महोत्सव में कुल 14 प्रतियोगिताएं होंगी और कुल 28 लाख के नगद इनाम प्रदान किए जाएँगे। इसमें किसी भी डिग्री कॉलेज के छत्र हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू है और इसकी अंतिम तिथि 2 अक्तूबर निर्धारित है, जो अंतराग्नि के आधिकारिक वेबसाईट www.antaragni.in  पर किए जा सकते हैं। 
जैसा कि प्रत्येक वर्ष होने वाले इस महोत्सव में देश दुनिया के हजारों छात्र-छात्राएं हिस्सा लेते हैं। वोलीवूड और अंतर्राष्ट्रीय कलाकार इसमें हिस्सा लेते हैं। यह अपने आप में अत्यंत अनूठा एवेंट्स है। डांस, सिंगिंग, ड्रामा, मॉडलिंग, फोटोग्राफी, क्विज, फाइन आर्ट्स, ड्रामाटिक्स, फिल्म एवं फोटोग्राफी आदि के अलावा इस एवेंट्स में इंगलिश और हिन्दी लिट्रेचर को भी प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। इंगलिश लिट्रेचर के अंतर्गत पोएटरी स्लेम, जैम, क्रिएटिव राइटिंग, वर्ल्ड गेम्स और पार्लियामेंट्री डिबेटस होगी जबकि हिन्दी साहित्य के अंतर्गत किरदार, काव्यांजलि, दृष्टिकोण, आमने-सामने और शब्द रंग जैसी प्रतियोगिताएं होंगी। इन प्रतियोगिताओं के अंतर्गत डांस पर कुल पाँच लाख रूपये, म्यूजिकल पर ढाई लाख, क्विज पर एक लाख, फाइन आर्ट्स पर एक लाख, ड्रामाटिक्स पर तीन लाख, फिल्म और फोटोग्राफी पर ढाई लाख तथा इंगलिश लिट्रेचर और हिन्दी साहित्य पर डेढ़-डेढ़ लाख के इनाम वितरित किए जाएँगे।

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सत्‍यमेव जयते ! ... (?): अच्‍छी बात... गंदी बात

बुधवार, 5 जुलाई 2017

हमारे देश में इंसान भले ही अनगिनत धर्मों में बंटे रहे, विपक्ष का एक ही धर्म है और वह है, विरोध

सत्‍यमेव जयते ! ... (?): अच्‍छी बात... गंदी बात:  बात ज्यादा पुरानी नहीं है। राष्ट्रऋषि सात समंदर पार देश अमेरिका गए थे। अच्छी बात है। हाल-फिल...

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मनुष्य के आंतरिक और भावनात्मक पहलू को मजबूत करता है ब्लॉग लेखन :नीरज "नैथानी"

शनिवार, 1 जुलाई 2017

जोहोर बहरू (मलेशिया ): वैश्विक स्तर पर ब्लॉगरों को एकजुट कर साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को प्राणवायु देने के उद्देश्य से संस्थापित संस्था परिकल्पना के तत्वावधान में विगत 21 जून 2017 और 25 जून 2017 के बीच सिंगापुर और मलेशिया के जोहोर बहरू तथा कुवलालम्पुर में आठवाँ अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी श्रीमती सत्या सिंह "हुमैन" तथा उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार श्री नीरज कुमार "नैथानी" की गरिमामयी उपस्थिती में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे ने कहा कि आज जहां पूरा विश्व विकास और प्रगति की अंधी दौड़ में इस कदर भाग रही है कि मनुष्य का आंतरिक और भावनात्मक पहलू गौण होता जा रहा है। ऐसे में लखनऊ के एक ब्लॉगर रवीन्द्र प्रभात के द्वारा अपनों को अपनों के साथ मिलन कराने तथा भारतीय महाद्वीप की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया में फैलाने की दिशा में कार्य करना गर्व महसूस कराता है। परिकल्पना को मेरी शुभकामनायें और भारतीय ब्लॉगरों को बहुत-बहुत बधाइयाँ।
उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी श्रीमती सत्या सिंह "हुमैन" ने कहा कि मैं अभिभूत हूँ कि हमारे भारतवासी पूरी दुनिया में घूम घूमकर ब्लोगिंग के माध्यम से हिन्दी और भारतीय भाषाओं को प्रमोट कर रहे हैं। यह परंपरा बनाए रखने की जरूरत है।
इस अवसर पर परिकल्पना समय पत्रिका के मुख्य संपादक श्री रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि "ब्लॉगिंग वुद्धिजीवियों का एक प्रमुख आहार है, क्योंकि ब्लॉगिंग ने हमारे हाथ में ऐसा हथियार दिया है जिससे हम दुनिया के किसी भी कोने में पलक झपकते पहुँच सकते हैं।”
इसके अतिरिक्त, श्री हरीशंकर श्रीवास्तव शलभ द्वारा रचित पुस्तक 'सिंहेश्वर स्थानक सम्पूर्ण इतिहास' तथा श्रीमती कुसुम वर्मा की सद्य; प्रसारित ऑडियो सीडी "जय श्री हनुमान" का लोकार्पण भी माननीय श्री नकुल दुबे द्वारा सम्पन हुआ। इस अवसर पर श्री जय कृष्ण माटी एवं श्रीमती कुसुम वर्मा की मिश्रित कला प्रदर्शिनी भी आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण कला और भारतीय परंपरा का बड़ा ही मनोरम चित्र प्रस्तुत किया गया। उसके पश्चात् भारत से आये प्रसिद्ध कवियोंं ने अपनी कविताओं के माध्यम से सभा को मंत्र मुग्ध किया।
इस अवसर पर बिहार के प्रगतिशील कवि श्री अरविंद श्रीवास्तव को अविनाश वाचस्पति स्मृति परिकल्पना सम्मान से अलंकृत और विभूषित किया गया। इस विशेष सम्मान के अंतर्गत उन्हें स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और 11 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की गयी। इस अवसर पर अवधि की प्रसिद्ध लोकगायिका कुसुम वर्मा द्वारा लोकगायन और नृत्य भी प्रस्तुत किया गया।
23 जून 2017 को मलेशिया के जोहोर बहरू में योजित आठवें अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार श्री नीरज कुमार नैथानी, श्री जय कृष्ण पैन्यूली, श्री धीरेन्द्र सिंह रांगढ, रेवान्त पत्रिका की संपादक डॉ अनीता श्रीवास्तव, लोक गायिका कुसुम वर्मा, पुरातत्वविद डॉ रमाकांत कुशवाहा ‘कुशाग्र‘, शिक्षाविद डॉ विजय प्रताप श्रीवास्तव, श्री उमेश पटेल श्रीश, सचिंद्रनाथ मिश्र और अंकिता सिंह आदि भी सम्मानित किए गए।
इस अवसर पर भारतीय सभ्यता-संस्कृति को आयामित करती लोक कला प्रदर्शनी, नृत्य, गीत के साथ-साथ परिकल्पना की स्मारिका का भी लोकार्पण भी संपन्न हुआ।
परिचर्चा सत्र के दौरान अपने उद्वोधन के क्रम में ब्लॉग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर शांति-सद्भावना की तलाश विषय पर बोलते हुये श्री उमेश पटेल श्रीश ने कहा कि यही एक माध्यम है जो पूरी तरह वैश्विक है। आपके विचार चंद मिनटो में पूरी तरह वैश्विक हो जाती है और उस पर प्रतिक्रियाएँ भी आनी शुरू हो जाती है। यदि ब्लॉगर चाहे तो अपने सुदृढ़ विचारों के बल पर पूरी दुनिया में शांति-सद्भावना को स्थापित कर सकता है। आज जरूरत इसी बात की है। इस परिचर्चा में लगभग आधा दर्जन ब्लॉगरों ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ, कार्यक्रम का संचालन लखनऊ की श्रीमती कुसुम वर्मा और गोरखपुर के श्री उमेश पटेल श्रीश ने किया।
(जोहोर बहरू से सांस्कृतिक संबाददाता की रपट)

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होली आयी रे आयी रे............।

रविवार, 12 मार्च 2017

सभी मित्रों को होली की बहुत बहुत शुभकामनायें। स्वरचित चन्द पंक्तियों के साथ
होली में सब हो जाओ
रंग विरंगे लाल
उर में भर लो नेह को
न रहे कोई मलाल
प्रेम रंग रंगों देश तुम
सब नफरत धुल जाय
एकता के हवन कुंड में
विवाद सारे भस्माय।

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पहाड़ मनुवादी हैं

शनिवार, 21 जनवरी 2017



हमें पहाड़ों से शिक़ायत है...
कि सारी वर्फ़
और ख़ूबसूरती पर
उन्होंने सदियों से क़ब्ज़ा कर रखा है
गहरी घाटियों को 
इन सबसे वंचित रखा है  
ये मनमानी ना-क़ाबिले बर्दाश्त है  
यह पहाड़ों की मनुवादिता है  
हम कसम खाते हैं
कि कैलाश की बर्फ़ लाकर
घाटियों में डाल देंगे
और घाटियों के आगे 
साइन बोर्ड पर उनका नाम लिख देंगे 
-"पहाड़"
हमारा वादा है
कि ये दुनिया के सबसे ऊँचे "पहाड़" होंगे...
एवरेस्ट से भी ऊँचे ।

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कार्टून :- नया है ज़माना

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017


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राहुल गाँधी का ट्विटर अकाउंट हुआ हैक - पेलम पेल वर्ल्ड न्यूज़ (जनवरी 201...

मंगलवार, 17 जनवरी 2017

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न्यूजीलैंड गवाह बना सप्तम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन का

मंगलवार, 10 जनवरी 2017

ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) .विगत 23 दिसंबर 2016 से 01 जनवरी 2017 के बीच न्यूजीलैंड के ऑकलैंड, हेमिल्टन, रोटोरूआ आदि शहरों में आयोजित सातवें अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में फिजी के शिक्षा मंत्रालय के हिन्दी प्रतिनिधि श्री रमेश चन्द्र, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी, न्यूजीलैंड नेशनल पार्टी की सांसद डॉ परमजीत परमार तथा हिन्द मेडिकल कॉलेज लखनऊ के निदेशक डॉ ओ. पी. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। 

सभा का प्रारंभ कोरियन ड्रमबीट के द्वारा बड़े ही सकारात्मक रूप से हुआ। इस अवसर पर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि आज जहां पूरा विश्व विकास और प्रगति की अंधी दौड़ में इस कदर भाग रही है कि मनुष्य का आंतरिक और भावनात्मक पहलू गौण होता जा रहा है। ऐसे में लखनऊ के एक ब्लॉगर रवीन्द्र प्रभात के द्वारा अपनों को अपनों के साथ मिलन कराने तथा भारतीय महाद्वीप की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया में फैलाने की दिशा में कार्य करना गर्व महसूस कराता है। परिकल्पना को मेरी शुभकामनायें और भारतीय ब्लॉगरों को बहुत-बहुत बधाइयाँ। न्यूजीलैंड की सत्ताधारी नेशनल पार्टी की सांसद श्रीमती परमजीत परमार ने कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है अपने भारतवासियों को न्यूजीलैंड की धरती पर अपने मध्य पाकर। मैं अभिभूत हूँ कि हमारे भारतवासी पूरी दुनिया में घूम घूमकर ब्लॉगिंग के माध्यम से हिन्दी और भारतीय भाषाओं को प्रमोट कर कर रहे हैं। यह परंपरा बनाए रखने की जरूरत है। 

उन्होने अपने भाषण में आगे कहा कि भारत और हिंदी भाषा से उनका विशेष लगाव रहा है, मुझे बहुत ख़ुशी है कि इस न्यूजीलैंड के जमीन पर भी भारतवासी अपनी मातृभाषा हिंदी का प्रचार- प्रसार और लेखन कार्य बड़े ही सफलतापूर्वक कर रहें हैं। वहीं फिजी से आये श्री रमेश चंद ने फिजी में होने वाले हिंदी सम्मेलन में सबको आमंत्रित किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि पुस्तकों और समाचारपत्रों में लेखन कार्य की अपनी सीमाएं होती है लेकिन ब्लॉगर के माध्यम से लेखक शुद्ध रूप से अपनी बात पाठकों तक पहुँचा सकता है, उसमें किसी प्रकार का बनावटीपन नहीं होता। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर श्रीमती कुसुम वर्मा की मिश्रित कला प्रदर्शिनी भी आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण कला और भारतीय परंपरा का बड़ा ही मनोरम चित्र प्रस्तुत किया गया। उसके पश्चात् इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ, जिसमें भारत, न्यूजीलैंड, ओस्ट्रेलिया तथा फ़िजी के कवियों ने हिस्सा लिया। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सभा को मंत्र मुग्ध किया। 

इस अवसर पर हैदराबाद की कवयित्री और ब्लॉगर श्रीमती सम्पत देवी मुरारका तथा रायपुर छतीसगढ़ की कथाकार और ब्लॉगर डॉ उर्मिला शुक्ल को क्रमश: डॉ अमर कुमार स्मृति परिकल्पना सम्मान तथा अविनाश वाचस्पति स्मृति परिकल्पना सम्मान से अलंकृत और विभूषित किया गया। इस विशेष सम्मान के अंतर्गत उन्हें स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और 11 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की गयी। 25 दिसंबर 2016 को ऑकलैंड के हेंडरसन में स्थित केलस्टन कम्यूनिटी हॉल न्यूजीलैंड में आयोजित सातवें अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में श्रीमती मुरारका के अतिरिक्त भारत के विभिन्न हिस्सों से आए मसलन संस्कार टीवी, दिल्ली के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर रवि कान्त मित्तल, आजतक और इंडिया टुडे की समाचार संपादक सीमा गुप्ता, कबीर कम्यूनिकेशन की क्रिएटिव हेड सर्जना शर्मा, रेवान्त पत्रिका की संपादक डॉ अनीता श्रीवास्तव, लोक गायिका कुसुम वर्मा, उद्घोषिका श्रीमती रत्ना श्रीवास्तव, कथाकार डॉ अर्चना श्रीवास्तव, कवयित्री डॉ निर्मला सिंह निर्मल, पुरातत्वविद डॉ रमाकांत कुशवाहा ‘कुशाग्र‘, शिक्षाविद डॉ विजय प्रताप श्रीवास्तव आदि भी सम्मानित किए गए। 

इस अवसर पर भारतीय सभ्यता-संस्कृति को आयामित करती लोक कला प्रदर्शनी, नृत्य, गीत के साथ-साथ परिकल्पना की स्मारिका, डॉ अर्चना श्रीवास्तव की सद्य प्रकाशित कृति थाती, डॉ निर्मला सिंह निर्मल की यह व्यंग्य नहीं हकीकत है और श्रीमती सम्पत देवी मुरारका की व्यंग्य यात्रा तृतीय का लोकार्पण भी संपन्न हुआ। परिचर्चा सत्र के दौरान अपने उद्वोधन के क्रम में ब्लॉग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर शांति-सद्भावना की तलाश विषय पर बोलते हुये श्री रवीकान्त मित्तल ने कहा कि यही एक माध्यम है जो पूरी तरह वैश्विक है। आपके विचार चंद मिनटो में पूरी तरह वैश्विक हो जाती है और उस पर प्रतिक्रियाएँ भी आनी शुरू हो जाती है। यदि ब्लॉगर चाहे तो अपने सुदृढ़ विचारों के बल पर पूरी दुनिया में शांति-सद्भावना को स्थापित कर सकता है। आज जरूरत इसी बात की है। इस परिचर्चा में लगभग आधा दर्जन ब्लॉगरों ने हिस्सा लिया।

 नव वर्ष से पूर्व यानी 30 दिसंबर 2016 को भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में न्यूजीलैंड के वरिष्ठ सांसद श्री कंवलजीत सिंह बख्शी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से विभिन्न देशों तथा समुदायों के बीच संस्कृतियों का आदान प्रदान होता है। आप सभी का हम न्यूजीलैंड की इस खूबसूरत भूमि पर स्वागत करते हैं। इस अवसर पर अवधि की प्रसिद्ध लोकगायिका कुसुम वर्मा द्वारा लोकगायन और नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन लखनऊ की श्रीमती रत्ना श्रीवास्तव ने किया।

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