प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ. इसके द्वारा संचालित Blogger.
प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है जहां आपके प्रगतिशील विचारों को सामूहिक जनचेतना से सीधे जोड़ने हेतु हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं !

Human today

मंगलवार, 24 नवंबर 2015

सभी ब्लॉगर मित्रों को नमस्कार
बहुत दिन बाद आप मित्रों के सम्मुख आने का मौका मिला , मित्रों नव प्रकाशित हिंदी मासिक पत्रिका "ह्यूमन टुडे " को सम्पादन करने की जिम्मेदारी मिली है. ऐसे में आपलोगों की याद आनी स्वाभाविक है. भले ही इतने दिनों तक गायब रहा लेकिन आपसे दूर नहीं , मैं चाहता हूँ की जो ब्लॉगर मित्र अपनी रचनाओ के माध्यम से मुझसे जुड़ना चाहते है , मै  उनका सहर्ष स्वागत करता हूँ।  सामाजिक सरोकारों से जुडी इस पत्रिका में आपकी रचनाओ का स्वागत है , जो मित्र मुझसे जुड़ना चाहते हैं वे अपनी रचनाएँ मुझे मेल करें। रचना के साथ अपनी फोटो और संक्षिप्त विवरण भी दीजिये।
humantodaypatrika@gmail.com
रचनाएँ राजनितिक , सामाजिक व् ज्ञानवर्धक हो। कविता , कहानी व विभिन्न विषयो पर लेख आमंत्रित।
harish singh ---- editor- Humantoday

Read more...

रवीन्द्र प्रभात बने साउथ एशिया टुडे पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष

गुरुवार, 15 अक्तूबर 2015


लखनऊ। विगत कई वर्षों में नेट पर साहित्य को अच्छा खासा स्पेस मिला है। यह साहित्य के लिए एक शुभ लक्षण है। आज साहित्य के लिए एक संक्रामण का दौर है और ऐसे समय में जब यह कहा और फैलाया जा रहा है कि लोग साहित्य नहीं पढ़ते तब नेट पर यह काम बेहतर तरीके से किया जाना आश्चर्यचकित करता है। पिछले दिनों परिकल्पना अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग प्रसार समिति की अध्यक्ष और न्यूजीलैंड की प्रवासी भारतीय साहित्यकार श्रीमती सुमन कपूर और दक्षिण एशिया के प्रमुख अँग्रेजी समाचार पोर्टल साउथ एशिया टुडे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी म्यूदुल हसन रिजवी लखनऊ में थे। दोनों शख्शियतों ने विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन के संस्थापक- संचालक और परिकल्पना समूह के प्रमुख लखनऊ निवासी रवीन्द्र प्रभात से मुलाक़ात कर आगामी दो अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन के प्रायोजन पर विचार-विमर्श किए। 

सूमन कपूर ने जहां सातवें ब्लॉगर सम्मेलन के कार्यक्रम स्थलों को लेकर एक रफ ले आउट रवीन्द्र प्रभात के समक्ष रखा वहीं म्यूदुल हसन रिजवी ने थाईलैंड में होने वाले आगामी षष्टम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में मंच साझा करने का प्रस्ताव रखा। श्री रिजवी ने अपने प्रस्ताव में यह उल्लेख करते हुये कहा कि आगामी जनवरी 2016 में थाईलैंड में परिकल्पना द्वारा आयोजित षष्टम अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन में परिकल्पना के मंच से साउथ एशिया टुडे दक्षिण एशिया की तीन प्रमुख भाषाओं क्रमश: हिन्दी, अँग्रेजी तथा उर्दू के 10 ब्लॉगरों, मिडियाकर्मियों और साहित्यकारों को सम्मानित करेगा, जिसके अंतर्गत पाँच महिला तथा पुरुष ब्लॉगरों, मिडियाकर्मियों तथा साहित्यकारों को कैटेगरी वाइज़ एग्यारह हजार तथा पाँच महिला तथा पुरुष ब्लॉगरों, मिडियाकर्मियों तथा साहित्यकारों को कैटेगरी वाइज़ पाँच हजार पाँच सौ रुपये की धनराशि, अंगवस्त्र, सम्मान पत्र आदि साउथ एशिया टुडे की ओर से प्रदान किए जाएँगे। 

श्री रिजवी के अनुसार इसके अंतर्गत हिन्दी, अँग्रेजी और उर्दू भाषा के तीन ब्लॉगर, तीन साहित्यकार, दो मिडियाकर्मी, एक लोकगायक और एक सोशल मीडियाकर्मी का चयन किया जाएगा। नामांकन की प्रक्रिया इसी माह शुरू की जाएगी और पाँच सदस्यीय पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष रवीन्द्र प्रभात होंगे । इस अवसर पर रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि साहित्य के प्रति नेट यूजर्स में लगाव बढ़ा है। चाहे ब्लॉग हो या सोशल मीडिया अभिव्यक्ति के लोकतन्त्र का एक बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। ऐसे पहली बार साउथ एशिया टुडे द्वारा परिकल्पना के अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन का मंच साझा करना और पुरस्कार योजना की शुरुआत करना प्रशंसनीय है। हम ऐसी पहल का स्वागत करते हैं।

Read more...

ब्लॉग पर हाशिये का समाज विषय पर आधारित परिचर्चा में खुलकर बोले दक्षिण एशियाई ब्लॉगर्स

बुधवार, 21 जनवरी 2015


पाँच पुस्तकों व  परिकल्पना समय पत्रिका के  साथ-साथ 
परिकल्पना कोश वेबसाईट का हुआ लोकार्पण

 थिम्पू (भूटान) हिंदी ब्लॉगिंग का दायरा सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी तेजी से फ़ैल  रहा है।  इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से ब्लॉगर और साहित्यकार एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव, हैदराबाद की सम्पत देवी मुरारका और रायपुर छतीसगढ़ के ललित शर्मा को विगत 15 से 18 जनवरी 2015 तक भूटान की राजधानी थिम्पू और सांस्कृतिक राजधानी पारो में आयोजित चतुर्थ ‘‘अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘‘ के दौरान  सर्वोच्च परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान से नवाजा गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें 25,000 की धनराशि, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। साथ ही महाराष्ट्र के औरंगाबाद की अनुवादक सुनीता प्रेम यादव को परिकल्पना सार्क सम्मान प्रदान किया गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें पाँच  हजार की धनराशि, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। 

उत्तर प्रदेश के जनपदों मसलन सुल्तानपुर के डॉ राम बहादुर मिश्र को परिकल्पना साहित्य भूषण सम्मान, बाराबंकी के  एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन व डॉ विनय दास को क्रमशः परिकल्पना सोशल मीडिया सम्मान और परिकल्पना कथा सम्मान, लखनऊ की कुसुम वर्मा को परिकल्पना लोक-संस्कृति सम्मान, बहराइच के डॉ अशोक गुलशन को परिकल्पना हिन्दी गौरव सम्मान, रायबरेली से सूर्य प्रसाद शर्मा को परिकल्पना साहित्य सम्मान तथा हैदरगढ के ओम प्रकाश जयंत व विष्णु कुमार शर्मा को क्रमशः को परिकल्पना साहित्य श्री सम्मान व परिकल्पना सृजन श्री सम्मान तथा उन्नाव के विश्वंभरनाथ अवस्थी को परिकल्पना नागरिक सम्मान प्रदान किए गए। इसके अलावा इंदौर के प्रकाश हिन्दुस्तानी, रायपुर के गिरीश पंकज, अल्पना देशपांडे, अदिति देशपांडे, दिल्ली की सर्जना शर्मा और निशा सिंह, मुंबई से आलोक भारद्वाज, सिल्चर की डॉ शुभदा पाण्डेय आदि के साथ-साथ  देश-विदेश के लगभग तीस ब्लॉगर्स को विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए परिकल्पना सम्मान से नवाजा गया। 
उपरोक्त सभी सम्मान भूटान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव श्री फूब शृंग के कर कमलों से दिये गए। इस अवसर पर भूटान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उप महासचिव श्री चन्द्र क्षेत्री, सार्क समिति के महिला विंग तथा इन्टरनेशनल स्कूल ऑफ भूटान की अध्यक्ष श्रीमती थिनले ल्हाम, असम विश्वविद्यालय सिल्चर के भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर नित्यानन्द पाण्डेय, इलाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव और हिन्दी के वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री गिरीश पंकज विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उक्त जानकारी ’परिकल्पना समय’ के प्रधान संपादक तथा ’अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन’ के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने दी। 

सम्मेलन के दौरान वैश्विक परिप्रेक्ष्य विशेषकर सार्क देशों में हिन्दी के पठन-पाठ्न, हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार, न्यू मीडिया के रूप में ब्लॉगिंग के विभिन्न आयामों एवं बदलते दौर में सोशल मीडिया की भूमिका इत्यादि विषयों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भूटान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव श्री फूब शृंग ने कहा कि भूमण्डलीकरण के इस दौर में विभिन्न देशों के साहित्य, संस्कृति एवं परिवेश को ब्लागिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से न सिर्फ महसूस किया जा सकता है बल्कि उसे विस्तार भी दिया जा सकता है। उन्होंने  भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रपति की हालिया भूटान यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भूटान में अंतर्राष्ट्रीय  ब्लागर सम्मेलन को भी उसी कड़ी  में देखने की जरूरत है। सार्क समिति के महिला विंग  की अध्यक्ष श्रीमती थिनले ल्हाम ने कहा कि नारी सशक्तीकरण पर आज विश्व भर में चर्चा हो रही है और ऐसे में सार्क देशों में ब्लागिंग से जुडी तमाम महिलाओं को देखना एक सुखद एहसास देता है। 

इलाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ और ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि ब्लॉगिंग  न सिर्फ देशों और भाषाओं के बीच दूरियाॅं कम करती है बल्कि यह विभिन्न प्लेटफार्म पर काम कर रहे लोगों के विचारों को एकाकार रूप में देखने की सहूलियत भी देती है । ब्लागिंग व सोशल मीडिया के समाजिक सरोकारों पर चर्चा करते हुए इसे उन्होंने  दूर दराज के इलाकों तक भी जोडने की बात कही। असम विश्वविद्यालय सिल्चर के भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर नित्यानन्द पाण्डेय  ने कहा कि हिन्दी को समृद्ध करने में ब्लागिंग का महत्वपूर्ण योगदान है और इसके माध्यम से दुनिया भर के लोग हिन्दी से जुड रहे हैं। वरिष्ठ व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने अपने उद्बोधन में हिंदी ब्लॉगिंग के विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते हुए इसे पुस्तकाकार रूप में भी लिपिबद्ध करने की बात कही। 
सम्मेलन के संयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि भूटान में अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मलेन आयोजित करने के पीछे उद्देश्य हिंदी संस्कृति को भूटानी संस्कृति के करीब लाना और हिंदी भाषा को यहाँ के वैश्विक वातावरण में प्रतिष्ठापित करना है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का मूल उद्देश्य दक्षिण एशिया में ब्लॉग के विकास हेतु पृष्ठभूमि तैयार करना, हिंदी-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना, भाषायी सौहार्द्रता एवं सांस्कृतिक अध्ययन-पर्यटन का अवसर उपलब्ध कराना है। 

इस अवसर पर पांच पुस्तकों क्रमशः संपत देवी मुरारका की यात्रा वृत्त तृतीय भाग, कुसुम वर्मा की ह्रदय कँवल, सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर की संघर्षों का खेल, विष्णु कुमार शर्मा की दोहावली, अशोक गुलशन की क्या कहूँ किससे कहूँ और परिकल्पना समय पत्रिका के जनवरी अंक के विमोचन के साथ-साथ परिकल्पना कोश  वेबसाईट का लोकार्पण हुआ, वहीं रायपुर छत्तीसगढ़ की अल्पना देशपांडे और अदिति देशपांडे की कलाकृतियों की प्रदर्शनी का लोकार्पण संपन्न हुआ।  इस अवसर पर कुसुम वर्मा के अवधी लोकगीतों की खुशबू में नहाई भूटान की एक शाम। डॉ राम बहादुर मिश्र के कुशल संचालन में सुर सरस्वती और संस्कृति की त्रिवेणी प्रवाहित करती काव्य संध्या और ब्लॉग पर हाशिए का समाज परिचर्चा में शामिल हुए भारत और भूटान के एक दर्जन से ज्यादा ब्लोगर्स। कार्यक्रम का  संचालन महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी श्रीमती सुनीता प्रेम यादव ने किया।
(भूटान से मनोज कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट)

Read more...

रविवार, 14 दिसंबर 2014

धार्मिक स्वतंत्रता के अर्थ

भोजन, आवास, और सुरक्षा जीवन की मूलभूत अत्यावश्यकतायें हैं जिनके लिये संघर्ष होते रहे हैं । इन आवश्यकताओं की सुनिश्चितता के लिये कुछ शक्तिशाली लोग कभी राजतंत्र तो कभी लोकतंत्र के सपने दिखाकर स्वेच्छा से ठेके लेते रहे हैं । सभ्यता के विकास के साथ-साथ अवसरवादी लोगों ने भी धर्म के ठेके लेने शुरू कर दिये । भोजन, आवास और सुरक्षा की उपलब्धि के लिये एक सात्विक मार्ग के रूप में “धर्म” का वैचारिक अंकुश तैयार किया गया था किंतु अब मौलिक आवश्यकताओं की सुनिश्चितता के अन्य उपाय खोज लिये गये हैं और धर्म एक ऐसी भौतिक उपलब्धि बन गया है जिसकी प्राप्ति के लिये अधर्म और अनीति के रास्ते प्रशस्त हो चुके हैं । धर्म अब रत्नजड़ित मुकुट हो गया है जिसे पाने के लिये हर अधार्मिक व्यक्ति लालायित है । अधर्म ने धर्म का मुकुट पहनकर अपनी सत्ता को व्यापक कर लिया है । धर्म के नाम पर किये जाने वाले सारे निर्णय अब अधर्म द्वारा किये जाते हैं ।

धर्म के नाम पर भारत को खण्डित किया गया । पाकिस्तान बना, बांग्लादेश बना और अब मौलिस्तान और कश्मीर बनाने की तैयारी चल रही है । पूरे विश्व में धर्म के नाम पर हिंसा होती रही है ...लोग बटते रहे हैं ...समाज खण्डित होता रहा है .....स्त्रियों के साथ यौनाचार होता रहा है । धर्म के नाम पर वह सब कुछ होता रहा है जो अधार्मिक है । यह धर्म है जिसने लोगों को अपनी मातृभूमि छोड़ने के लिए विवश किया । यह धर्म है जिसने लोगों को अपने ही घर में शरणार्थी बनने पर विवश किया । ब्रितानिया पराधीनता से मुक्ति के बाद भी कश्मीरी पण्डितों को 1990 में अपने ही देश में शरणार्थी बनना पड़ा । धर्म यदि ऐसा विघटनकारी तत्व है जो हिंसा की पीड़ा का मुख्य कारक बन सकता है तो ऐसे धर्म की आवश्यकता पर विचार किए जाने की आवश्यकता है ।

भारत के संविधान में धर्म की स्वतंत्रता के साथ-साथ धर्म के प्रचार की भी स्वतंत्रता प्रदान की गयी है । इस प्रचार की स्वतंत्रता ने ही धर्म को एक वस्तु बना दिया है । धर्म अब आयात किया जाता है, धर्म के नाम पर अरबों रुपये ख़र्च किये जाते हैं । धर्म ने अपने मूल अर्थ को खो दिया है और अब वह व्यापार बन चुका है ।
मैं यह बात कभी समझ नहीं सका कि जिस धार्मिक स्वतंत्रा के कारण देश और समाज का अस्तित्व संकटपूर्ण हो गया हो उसे संविधान में बनाये रखने की क्या विवशता है ? क्या धार्मिक स्वतंत्रा को पुनः परिभाषित किये जाने की आवश्यकता नहीं है ? क्या धार्मिक स्वतंत्रता की सीमायें तय किये जाने की आवश्यकता नहीं है ? हम यह मानते हैं कि जो विचार या जो कार्य समाज और देश के लिये अहितकारी हो उसे प्रतिबन्धित कर दिया जाना चाहिये । मनुष्यता और राष्ट्र से बढ़कर और कुछ भी नहीं हो सकता । परस्पर विरोधी सिद्धांतों और विचारों को अस्तित्व में बनाये रखने की स्वतंत्रता का सामाजिक और वैज्ञानिक कारण कुछ भी नहीं हो सकता । ऐसी स्वतंत्रता केवल राजनीतिक शिथिलता और असमर्थता का ही परिणाम हो सकती है ।

बहुत से बुद्धिजीवी सभी धर्मों के प्रति एक तुष्टिकरण का भाव रखते हैं यह उनकी सदाशयता हो सकती है और छल भी । हम उन सभी बुद्धिजीवियों से यह जानना चाहते हैं कि यदि सभी धर्म मनुष्यता का कल्याण करने वाले हैं तो फिर उन्हें लेकर यह अंतरविरोध क्यों है? सारे धर्म एक साथ मिलकर मानव का कल्याण क्यों नहीं करते ? धर्म को लेकर ये अलग-अलग खेमे क्यों हैं ? ये एक ही लक्ष्य के लिये पृथक-पृथक मार्गों की संस्तुति क्यों करते हैं ?  कोई भी वैज्ञानिक सिद्धांत एक प्रकार के लक्ष्य के लिये विभिन्न मार्गों की संस्तुति नहीं करता तब धर्म के साथ ऐसा क्यों है ?


आप कह सकते हैं कि धर्म और विज्ञान दो पृथक-पृथक विषय हैं, उन्हें एक साथ रखकर किसी सिद्धांत की व्याख्या नहीं की जा सकती । मेरी सहज बुद्धि यह स्वीकार करने के लिये तैयार नहीं है । विज्ञान से परे कुछ भी नहीं है, धर्म और विज्ञान को पृथक नहीं किया जा सकता । पृथक करने से जो उत्पन्न होगा वह अधर्म ही होगा । 

Read more...

कार्टून :- सेल्‍फ़ी के पचड़े


Read more...

ग़ज़लगंगा.dg: उसने चाहा था ख़ुदा हो जाए

शनिवार, 13 दिसंबर 2014

उसने चाहा था ख़ुदा हो जाए

सबकी नज़रों से जुदा हो जाए.
उसने चाहा था ख़ुदा हो जाए.

चीख उसके निजाम तक पहुंचे
वर्ना गूंगे की सदा हो जाए.

अपनी पहचान साथ रहती है
वक़्त कितना भी बुरा हो जाए.

थक चुके हैं तमाम चारागर
दर्द से कह दो दवा हो जाए.

उसके साए से दूर रहता हूं
क्या पता मुझसे खता हो जाए.

कुछ भला भी जरूर निकलेगा
जितना होना है बुरा हो जाए.

होश उसको कभी नहीं आता
जिसको दौलत का नशा हो जाए.

घर में बच्चा ही कहा जाएगा
चाहे जितना भी बड़ा हो जाए.

-देवेंद्र गौतम

Read more: http://www.gazalganga.in/2014/12/blog-post.html#ixzz3Ll9YpXwSग़ज़लगंगा.dg: उसने चाहा था ख़ुदा हो जाए

Read more...

जौनपुर की website दो भाषाओँ में २०१० मई से आप सब के सामने है

शनिवार, 15 फ़रवरी 2014


जौनपुर की website दो भाषाओँ में २०१० मई से आप सब के सामने है | इसे समय समय पे  जौनपुर वासियों की आवश्यकताओं को देखते हुए नवीनीकरण किया जाता रहा है |  हिंदी की website जहां पूर्वांचल में अधिक देखी जाती है तो अंग्रेजी की वेबसाइट की आवाज़ पूरे विश्व में अधिक पहुँचती है |

आज तक कई लाख लोग इन वेबसाइट को देख चुके हैं और जौनपुर वासियों के सहयोग से इसके पाठकों में हर दिन वृधि होती जा रही है |

अंग्रेजी की नयी website अपने आपमें बहुत से नए विकल्प ले के आयी है जिसे  समय के साथ साथ जौनपुर के लोगों की सुविधा को देखते हुए जोड़ा गया है | कुछ नए विकल्प आपके सामने हैं जिन्हें आप भी देखें | इनके बारे में लोगों को बताएं और इसका इस्तेमाल करके फायदा उठाएं और इस से जुड़ के जौनपुर का गौरव बढायें |

आपकी आवाज़ और जौनपुर का इतिहास पूरी दुनिया तक पहुंचाती इस website के नए आवरण को अवश्य देखें |
हिंदी http://www.hamarajaunpur.com/
English http://jaunpurcity.in/

1. जौनपुर वासियों की सुविधा के लिए हमेशा से एक डायरेक्टरी की कमी महसूस की जाती रही है | अंग्रेजी की website में इसे yellow page option में जोड़ा गया है |

यदि आप किसी तरह का व्यापार करते हैं या सामाजिक कार्य करते हैं तो उसे  यहाँ मुफ्त में जुड़वा के दुनिया को और जौनपुर के लोगों को बताएं | यह आपके व्यापार को बढाने में सहायक होगा |

आपके  व्यापार इत्यादि को जुड़ने के लिए आप संचालक श्री एस एम् मासूम को इ मेल या एस एम् एस कर सकते है या फिर जौनपुर बाज़ार के facebook पेज पे जा के उसे लिख दें | जल्द से जल्द उसे मुफ्त सेवा के वायदे के अनुसार जल्द से जल्द जोड़ दिया जायेगा |

२)  जौनपुर की इस दो भाषाओँ में शुरू की गयी वेबसाइट का मकसद धन कमाना नहीं बल्कि जौनपुर को दुनिया से जोड़ना है इसलिए विज्ञापन  की सुविधा अभी तक नहीं दी गयी थी लेकिन जौनपुर के लोगों के अनुरोध पे इसे अभी हिंदी की वेबसाइट पे शुरू किया जा रहा है जिसमे विज्ञापन के दर बहुत कम होंगे जिससे की इस सुविधा का लाभ छोटा व्यापारी भी उठा सके | आप यहाँ इसके बारे में जान सकते हैं |

३. अंग्रेजी की website पे पहले लोगों को पुराने लेख इत्यादि तलाशने में असुविधा हुआ करती थी जिसे देखते हुए इसमें बहुत से नए section जोड़े गए हैं जैसे history, news, society,lifestyle, notable jaunpuri इत्यादि जिस से अब आप एक क्लिक से ही बहुत से जानकारी पहले पेज पे ही पा सकते हैं |


४. जौनपुर की यह दोनों website को अब आप अपने मोबाइल से भी आसानी से देख सकते हैं |

5. आपका गाँव आपको अवश्य प्यारा होगा और दुनिया तक उसकी तस्वीरें वहाँ के लोगों के बारे में दुनिया को बताने का मन भी करता होगा तो इंतज़ार आपका अब ख़त्म हुआ | फ़ौरन लिखें संचालक एस एम् मासूम को और भेजें आने गाँव के बारे में तस्वीरों के साथ |

आपके सुझावों का स्वागत है और सहयोग की आशा | आभार संचालक - एस एम् मासूम
facebook

जौनपुर बाज़ार पेजhttps://www.facebook.com/jaunpurbazaar

जौनपुर शहर पेज https://www.facebook.com/jaunpurshahar

जौनपुर के विडियो देखें http://www.youtube.com/user/payameamn

साभार - एस एम् मासूम

Read more...

लो क सं घ र्ष !: सरदार पटेल भी भाजपा के प्रतीक नहीं बन पायेंगे

शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

आरएसएस, भाजपा (और भाजपा के पूर्व संस्करण जनसंघ) हमेशा एक प्रतीक की तलाश में रहे हैं। उनका अपना कोई ऐसा नेता पैदा नहीं हुआ जो खुद प्रतीक के रूप में याद किया जा सकता। ऐसे अकाल में निश्चय ही उन्हें एक प्रतीक के लिए भटकना पड़ रहा है। सत्तर के दशक में जनसंघ ने स्वामी विवेकानन्द को अपना प्रतीक गढ़ने का नापाक असफल प्रयास किया परन्तु विवेकानन्द के ऐतिहासिक शिकागो वक्तव्य ने जनसंघ की राह में रोड़े अटकाये जिसमें उन्होंने बड़ी शिद्दत से कहा था कि ”भूखों को धर्म की आवश्यकता नहीं होती है“। विवेकानन्द ने भूखों के लिए पहले रोटी की बात की जबकि जनसंघ और आरएसएस उस समय भारतीय पूंजीपतियों के एकमात्र राजनीतिक प्रतिनिधि के रूप में भारतीय राजनीति में कुख्यात थे।
उसी दशक में जनसंघ का अवसान हुआ और उसके नये संस्करण भाजपा का जन्म। भाजपा ने अपने जन्मकाल से सत्ता प्राप्ति के साधन के रूप में दो रास्ते निर्धारित किये - एक तो समाज के अंध धार्मिक विभाजन के जरिये मतों का ध्रुवीकरण और दूसरा एक प्रतीक को अंगीकार कर उसके आभामंडल के जरिये कुछ लाभ प्राप्त करना। पहले मंतव्य में तो भाजपा कुछ हद तक एक दौर में सफल रही परन्तु दूसरे मोर्चे पर उसके लगातार पराजय मिली है।
उन्होंने भगत सिंह को अपना प्रतीक बनाने की कोशिश इसलिए की क्योंकि शहीदे आजम भगत सिंह निर्विवाद रूप से भारतीय जन मानस में, और विशेष रूप से नवयुवकों में, एक नायक के रूप में जाने और पहचाने जाते हैं। भाजपा की यह बहुत बड़ी गलती थी क्योंकि भारतीय क्रान्तिकारियों में भगत सिंह उन नायकों में शामिल थे जिनके विचारों को पहले से ही बहुत प्रचार मिल चुका था। भगत सिंह के आदर्शों को भाजपा स्वीकार नहीं सकती क्योंकि वह ‘मार्क्सवादी’ दर्शन था। उन्होंने साम्प्रदायिकता के खिलाफ भी बोला और लिखा था जो पहले ही प्रकाशित हो चुका था। भाजपा एक बार फिर बुरी तरह असफल रही।
तत्पश्चात् भाजपा ने महात्मा गांधी को अपना प्रतीक बनाने की एक कोशिश की। अस्सी के दशक में ‘गांधीवादी समाजवाद’ लागू करने का नारा दिया गया। यह पहले की गल्तियों से कहीं बड़ी गलती थी। इस बात में कोई सन्देह नहीं कि गांधी एक महापुरूष थे और दुनियां के तमाम देशों में स्वतंत्रता और दमन के खिलाफ संघर्ष करने वालों ने उनके ‘सत्याग्रह’ के विचारों को लागू करने के सफल प्रयास किये परन्तु गांधी जी कभी समाजवादी नहीं रहे थे। इसलिए आम जनता कथित ‘गांधीवादी समाजवाद’ को स्वीकार भी नहीं कर सकती थी। दूसरे भाजपा की नाभि आरएसएस पर गांधी की हत्या का आरोप उस समय लग चुका था जब न तो जनसंघ वजूद में था और न ही भाजपा।
कांग्रेस नीत संप्रग अपने दो कार्यकाल पूरे कर रही है। निश्चित रूप से उसे पिछले 10 सालों के अपने काम-काज के कारण जनता में व्याप्त असंतोष का सामना आसन्न लोक सभा चुनावों में करना होगा। भाजपा इस अवसर का लाभ उठाने के लिए बहुत व्याकुल है। एक ओर वह अपने एक साम्प्रदायिक प्रतीक नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री का प्रत्याशी घोषित कर ध्रुवीकरण का प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर ‘लौह पुरूष’ के नाम से विख्यात कांग्रेसी नेता सरदार पटेल को अपना प्रतीक बना लेने की कोशिशें कर रही हैं।
भाजपा द्वारा मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किये जाने के पहले ही मोदी यह घोषणा कर चुके थे कि वे नर्मदा जिले में सरदार सरोवर बांध के पास सरदार पटेल की लोहे की एक 182 मीटर ऊंची विशालकाय प्रतिमा बनवायेंगे जो दुनियां की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी। इस प्रतिमा के निर्माण के लिए गांव-गांव से खेती में प्रयुक्त होने वाले लोहे के पुराने बेकार पड़े सामानों को इकट्ठा किया जायेगा। अभी हाल में उन्होंने इस प्रतिमा का शिलान्यास समारोह भी सम्पन्न करवा दिया। समारोह के पहले मोदी ने पटेल के प्रधानमंत्री न बनने पर अफसोस जताकर गुजराती अस्मिता को उभारने की कोशिश की। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सरदार पटेल की अंतेष्टि में जवाहर लाल नेहरू उपस्थित नहीं थे। एक तरह से मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर आक्रमण के जरिये ‘सोनिया-राहुल’ को भी निशाने पर लेना चाह रहे थे। कांग्रेस का मोदी पर पलट वार स्वाभाविक था।
भाजपा के किसी जमाने के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आणवानी आज कल आरएसएस की बौद्धिकी का काम संभाल चुके हैं। सोशल मीडिया पर ब्लॉग लेखन वे काफी समय से कर रहे हैं। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मोदी के नाम की घोषणा पर उन्होंने कुछ नाक-भौ जरूर सिकोड़ी थी परन्तु आज कल वे अपने ब्लॉग के जरिये मोदी के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। आरएसएस की यह पुरानी रणनीति रही है कि वह अपने सभी अस्त्र-शस्त्र एक साथ प्रयोग नहीं करती बल्कि किश्तों में करती है जिससे मुद्दा अधिक से अधिक समय तक समाचार माध्यमों में छाया रहे।
आणवानी जी ने पहला शिगूफा छोड़ा कि नेहरू ने कैबिनेट बैठक में 1947 में सरदार पटेल को साम्प्रदायिक कहा था। इसका श्रोत उन्होंने एक पूर्व आईएएस अधिकारी को बताया। इस बात पर भी प्रश्न चिन्ह है कि जिस अधिकारी का हवाला दिया गया है वह उस समय सेवा में था अथवा नहीं और अगर सेवा में था तो भी वह कैबिनेट बैठक में कैसे पहुंचा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि आजादी के पहले आईएएस नहीं आईसीएस होते थे। दो दिन बाद ही उन्होंने पूर्व फील्ड मार्शल मानेकशॉ के हवाले से अपने ब्लॉग में लिखा कि नेहरू 1947 में पाकिस्तान की मदद से कबाईलियों द्वारा कश्मीर पर हमले के समय फौज ही भेजना नहीं चाहते थे और फौज भेजने का फैसला सरदार पटेल के दवाब में लिया गया था। यह मामला भी कैबिनेट बैठक का बताया जाता है। इस पर भी प्रश्नचिन्ह है कि 1947 में मॉनेकशा फौज के एक कनिष्ठ अधिकारी थे और वे कैबिनेट बैठक में मौजूद भी हो सकते थेे अथवा नहीं। आने वाले दिनों में इसी तरह के न जाने कितने रहस्योद्घाटन आरएसएस की फौज करेगी जिससे मामला बहस और मीडिया में लगातार बना रह सके।
उत्सुकता स्वाभाविक है कि आखिर सरदार पटेल को इस गंदे खेल के मोहरे के रूप में क्यों चुना गया है? बात है साफ, दलीलों की जरूरत क्या है। एक तो भाजपा सरदार पटेल के नाम पर गुजराती वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहती है। दूसरे पटेल गुजरात की एक ताकतवर जाति है और उत्तर भारत की एक ताकतवर पिछड़ी जाति ‘कुर्मी’ भी अपने को सरदार पटेल से जोड़ती रही है। इस तरह उत्तर भारत में ‘कुर्मी’ वोटरों का ध्रुवीकरण भी उसका मकसद है।
मकसद कुछ भी हो, एक बात साफ है कि जब स्वामी विवेकानन्द भाजपा के न हो सके, न ही भगत सिंह और महात्मा गांधी तो फिर सरदार पटेल भी भाजपा के प्रतीक नहीं बन पायेंगे। सम्भव है कि चुनावों के पहले इसका भी रहस्योद्घाटन हो ही जाये कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध भी सरदार पटेल ने ही लगाया था और तत्कालीन संघ प्रमुख गोलवलकर से माफी नामा भी उन्होंने ही लिखाया था क्योंकि वे उस समय अंतरिम कैबिनेट में गृह मंत्री थे।
- प्रदीप तिवारी

Read more...

व्यंग्य-पुस्तक 'धरती पकड़ निर्दलीय' की प्रीबुकिंग शुरू

गुरुवार, 18 जुलाई 2013



हिंद युग्म ने रवीन्द्र प्रभात जी की व्यंग्य-पुस्तक 'धरती पकड़ निर्दलीय' की प्रीबुकिंग शुरू किया है। प्रकाशक शैलेश भारतवासी के अनुसार इस किताब में गाँव की एक चौपाल को केंद्र में रखते हुए देश की सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक स्थितियों पर करारा व्यंग्य किया गया है। किताब में सम्मिलित व्यंग्य आलेखों को इस तरह से पिरोया गया है कि वे व्यंग्य-उपन्यास पढ़ने का एहसास कराते हैं।

कल ईबे पर पुस्तक के बारे में पढ़ रहा था, लिखा गया है कि इसको पढ़ने के बाद राग दरबारी की याद ताज़ा हो जाएगी । धरतीपकड़ नि: संदेह भारतीय राजनीति का अद्भुत किरदार रहा है, निश्चित रूप से यह पुस्तक भी अद्भुत होगी ।  

मैंने तो इस पुस्तक की 10 प्रतियों की प्री बूकिंग कर दिया है । आप भी एक बार घूम आइए ऑनलाइन स्टोरों पर, क्योंकि किताब सभी प्रमुख ऑनलाइन स्टोरों पर प्रीबुकिंग के लिए उपलब्ध है।


ईबे पर मात्र रु 76 में (बिना किसी शिपिंग के खर्च के) उपलब्ध हैः

इंफीबीम पर भी यह किताब मात्र रु 76 में कैश ऑन डिलीवरी की सुविधा के साथ उपलब्ध हैः

बुकअड्डा प्रेमियों के लिए यह किताब मात्र रु 90 में उपलब्ध हैः 

Read more...

अमन का पैग़ाम: इस्लाम के खिलाफ नहीं है वंदे मातरम् शफीकुर्रहमान ब...

शुक्रवार, 10 मई 2013

अमन का पैग़ाम: इस्लाम के खिलाफ नहीं है वंदे मातरम् शफीकुर्रहमान ब...: बुधवार को लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से पहले सदन में 'वंदे मातरम्' की धुन बजने के दौरान संभल से बीएसपी सांसद ...

Read more...

About This Blog

भारतीय ब्लॉग्स का संपूर्ण मंच

join india

Blog Mandli

  © Blogger template The Professional Template II by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP