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श्रद्धांजलि उस वीर को !

रविवार, 27 फ़रवरी 2011


श्रद्धांजलि उस वीर को जिसको आज के दिन शहीद हुए ८० वर्ष हो चुके हैं।

उनके कर्ज को तो शायद पूरा देश आज भी नहीं चुकाने लायक हुआ है लेकिन उनके सपनों के भारत कि तस्वीर जरूर हमने बिगाड़ दी है। उस वीर चंद्रशेखर आज़ाद को शत शत नमन।

12 comments:

शिखा कौशिक 27 फ़रवरी 2011 को 11:54 am  

आजाद जैसे वीरों को मैं अपने इन शब्दों में शत-शत बार नमन करती हूँ -

''आज उस शख्स का महफ़िल में बड़ा जिक्र हुआ ;

लुटा दी जिन्दगी जिसने वतन के नाम पर .''

वन्दना 27 फ़रवरी 2011 को 12:11 pm  

सिवाय नमन करने के हम और कर भी क्या सकते हैं…………उनके बलिदान का क्या सिला दे रहा है ये देश सभी देख रहे हैं।

भारत देश के इस वीर को शत शत नमन्।

Atul Shrivastava 27 फ़रवरी 2011 को 12:38 pm  

शत शत नमन।
सही कहा वंदना जी ने।

शालिनी कौशिक 27 फ़रवरी 2011 को 12:46 pm  

आजाद जैसे वीर को नमन.

अख़्तर खान 'अकेला' 27 फ़रवरी 2011 को 1:19 pm  

aese vir ko the dil se shrddhanjli lekin in dinon aese vir desh me hen khaan dhundhte dhundhte thk gye hen hr koi chaahta he aese vir dusron ke ghron men peda ho or khud ke laal surkshit rhen bs is moqaa prsti ne hi to is desh ko ................ . akhtar khan akela kota rajsthan

Minakshi Pant 27 फ़रवरी 2011 को 2:41 pm  

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले |
वतन पे लुटने वालों का यही बाकि निशां होगा |

वीर चंद्रशेखर आज़ाद को शत शत नमन।

वन्दना 27 फ़रवरी 2011 को 3:02 pm  

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (28-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

मनोज पाण्डेय 27 फ़रवरी 2011 को 7:45 pm  

भारत देश के वीर चंद्रशेखर आज़ाद को श्रद्धांजलि औरआजाद जैसे वीर को शत शत नमन।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन 28 फ़रवरी 2011 को 6:56 am  

अपनी आयु के 25 वर्ष में देश पर शहीद हो जाने वाले चंद्रशेखर आज़ाद ने आत्मबलिदान का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। अमर शहीद को हार्दिक श्रद्धांजलि और शत शत नमन!

Kumar 28 फ़रवरी 2011 को 9:24 am  

". . . आज़द पूजा की निर्जीव वस्तु नहीं वरन निर्दिष्ट मार्ग पर मज़बूत क़दमों से चलने वाला पथिक है; एक ऐसा सिपाही है जो मौत को सामने खड़ा देख कर भी मुसकरा सकता है, उसे ललकार सकता है। और सबसे बड़ी बात तो यह कि वह एक मनुष्य है जिसमें बड़ा होकर भी बड़प्पन का अहंकार या अभिमान छू तक नहीं गया।" (P-55) (शिव वर्मा की किताब "स्मृतियाँ" से)

People who are debtor of his dreams have now forgotten the last day of his fight against slavery.

Remember him! His dreams! And, again raise the voice of 'equality', 'freedom' and 'exploitation free society'!

रवीन्द्र प्रभात 28 फ़रवरी 2011 को 10:17 am  

अमर शहीद को हार्दिक श्रद्धांजलि और शत शत नमन!
बहुत दिनों के बाद आपकी पोस्ट नजर आई ,अच्छी लगी....आभार !

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