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समाज को सही दिशा देने के प्रयासों में जुटे हैं खुशदीप

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

 

ब्लोगिंग की दुनिया में ख़ुशी के दीप जला रहे हैं खुश दीप जी

दोस्तों एक शख्स जिसके सीने में इंसानियत के जज्बात से
भरा हुआ एक दिल हो और जिसकी हर धडकन में ब्लोगिंग  का संसार हो जो हरजगह हर कोने में खुशियों के दीप जला कर अंधेरों को उजालों में बदलने वाला हो, उसी का नाम खुशदीप ब्लोगर है और यह अनोखे ब्लोगर अपनी पेनी कलम से सख्त अल्फाजों से समाज को सही दिशा देने के प्रयासों में जुटे हैं . ब्लोगिग्न के अपने आदाब और अखलाक हैं और इस कसोटी पर जनाब खुशदीप जी खरे उतरे हैं .


जी हाँ दोस्तों जिस खुशदीप की लेखनी की ताकत के आगे आप और में नत मस्तक हैं जो खुशदीप कई बार अपने लेखों में कडवी बातें भी घोल देते हैं लेकिन उनकी कडवाहट यूँ ही बे वजह नहीं होती वोह समाज में फेली बिमारियों को सूधारने के लियें अपनी ब्लोगिंग को एक दवा बनाकर देना चाहते हैं ताकि समाज की बिमारी दूर हो सके और काफी हद तक वोह इसमें कामयाब भी हो रहे हैं कोई भी मुद्दा हो ,कोई भी विचार हो भाई खुशदीप उस मुद्दे पर अपने प्रभावशाली और मोलिक विचार जरुर रखते हैं और भाई खुशदीप इन विचारों से प्रसिद्धि भी प्राप्त कर रहे हैं , अभी जब सारा देश अन्ना जिंदाबाद कहते हुए अन्ना हजारे का दीवाना था तब भाई खुशदीप ने एक मोलिक सोच के तहत व्यवहारिक सवाल दस सवाल अन्ना के सामने उठाने का साहस किया और वोह सभी सवाल इस देश के हालातों के लियें अन्ना से पूंछना जरूरी भी थे .


उत्तर प्रदेश के नोयडा में रहने वाले भाई खुशदीप देश की राजधानी दिल्ली के नजदीक है यह अखबारों में भी खूब छपते है कारण साफ़ है के खुशदीप जी एक चिंतक और लेखक के रूप में समाज सुधारक विचारक के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं , करीब सोलह साल से यह लेखन कार्य से जुड़े हैं और ब्लोगिंग की दुनिया में जो प्यार जो नाम इन्होने कमाया है उसी का नतीजा है के हमारीवाणी के खुशदीप हीरो बन गये हैं इस हमारीवाणी एग्रीगेटर में खुशदीप के बगेर ना ख़ुशी दिखती है न उजाला ही नजर आता है यह इस अग्रीगेटर के सलाहकारों में से एक हैं .


फरवरी २००९ से ब्लोगिग्न में अपनी जोर आज्माय्श कर रहे खुशदीप जी को लिखने और ब्लोगिंग की लत ऐसी लगी है के वोह इतना वक्त भी नहीं निकाल  पाते हैं के कुछ किताबे पढ़ डालें लेकिन उनके लेखन के चिन्तन,साधना से लगता हे के उन्होंने विश्व की सभी महत्वपूर्ण पुस्तकों को घोल कर पी डाला है अपने ब्लॉग स्लोग ओवर.......... देशनामा.......... के जलवे देखने लायक हे हर लेख ,हर रचना हजारों बार पढ़ी जाती हे सेकड़ों लोग इनके आलेखों पर अपने विचार टिप्पणियों के रूप में देते है और यही वजह है के भाई खुशदीप के अनुसरण कर्ताओं और टिप्पणीकारों की संख्या सर्वाधिक है करीब ५४०४ लोग है जो भाई खुशदीप को पसंद करने लगे है इन दिनों भाई खुशदीप अखबारों से दुखी हैं उनके आलेखों की चोरिया होने लगी हे उनकी मोलिकता को दुसरे लोग अपनी दूकान का सामन बताकर परोसने लगे हैं और इसकी शिकायत उन्होए अपने आलेखों के माध्यम से भी करना शुरू कर दी है खुशदीप का एक  ही विचार है उन्हें एक ही विचार से प्यार है वोह कहते हैं के .....इंसानियत का जो जज्बा जगाए ऐसी हर चीज़ का तलबगार हूँ में ............और इसीलियें भाई खुशदीप इंसानियत की तलाश में ,भाईचारा ,सद्भावना और प्यार की तलाश में घूम रहे हैं ....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

1 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 14 अप्रैल 2011 को 6:01 pm  

खुशदीप सहगल से कभी मिला तो नहीं हूँ मगर उनकी सदाशयता का कायल हूँ!

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