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क्या सिर्फ़ लिख कर ब्लागिंग की जाए : गिरीश बिल्लोरे मुकुल

रविवार, 18 दिसंबर 2011


पद्मसिंह जी के ब्लाग पद्मावलि से साभार 
  हिन्दी ब्लागिंग अब केवल लिपि आधारित ब्लागिंग नहीं रह गई है लोग आडियो-वीडियो ब्लागिंग के लिये भी आगे आ रहे हैं इनमें मध्य-प्रदेश सबसे अव्वल है इन्दौर से अर्चना चावजी “मेरे मन की’’(http://archanachaoji.blogspot.com) ब्लाग पर पाडकास्ट जिसे “आडियो-पोस्ट” का नाम दिया जा सकता है, प्रस्तुत करतीं हैं. इधर जबलपुर एक एक मशहूर ब्लागर महेंद्र मिश्रा एवम भाई डा० विजय तिवारी किसलय भी अपने वेबकास्टिंग  ब्लाग (http://bambuser.com/channel/vijaytiwari5)पर वीडियो-ब्लागिंग अर्थात वेबकास्टिंग करतें हैं.मुझे साल भर पहले उम्मीद न थी कि दिसम्बर 2010 को मेरे द्वारा खोजी गई वेबकास्टिंग को इतनी लोकप्रियता हासिल होगी.
                         पच्चीस बरस पहले किसी को भी यह गलत फ़हमी सम्भव थी कि मीडिया के संस्थागत संगठनात्मक स्वरूप में कोई परिवर्तन सहज ही न आ सकेगा. रेडियो,सूचना का आगमन अखबार, टी. वी.टेलेक्स,टेली-प्रिंटर, फ़ैक्स,फ़ोन,तक सीमित था. संचार बहुत मंहगा भी था तब. एक एक ज़रूरी खबर को पाने-भेजने में किस कदर परेशानी होती थी उसका विवरण  आज की पीड़ी से शेयर करो तो वह आश्चर्य से मुंह ताक़ती कभी कह भी देती है –“ओह ! कितना कुछ अभाव था तब वाक़ई !!”
    और अब उन्हीं ज़रूरतों की बेचैनीयों ने बहुत उम्दा तरीके से “सबसे-तेज़” होने की होड़ लगा दी.इतना ही नहीं   “मीडिया के संस्थागत संगठनात्मक स्वरूप में बदलाव” एकदम क़रीब आ चुका है.ब्लागिंग के विभिन्न स्वरूपों जैसे टेक्स्ट, के साथ ही साथ नैनो और माइक्रो ब्लागिंग का ज़माना भी अब पुराना हो चला तो फ़िर नया क्या है.. नया कुछ भी नहीं बस एकाएक गति पकड़ ली है वेबकास्टिंग ने पाडकास्टिंग के बाद . और यही परम्परागत दृश्य मीडिया के संस्थागत आकार के लिये विकल्प बन चुका है. लोगों के हाथ में थ्री-जी तक़नीक़ी वाले सेलफोन हैं.जिसके परिणाम स्वरूप अन्ना के तिहाड़ जेल में जाने पर वहां जमा भीड़ का मंज़र लोग अपने घर-परिवार को दिखाते रहे. जबकि  न्यूज़ चैनल से खबर आने में देर लगी. हिन्दी ब्लागिंग में वेब कास्टिन्ग का प्रयोग उत्तराखण्ड के खटीमा शहर में दिनांक 09-01-2011 एवम 10-01-2011 को  साहित्य शारदा मंच के तत्वावधान में डारूपचन्द्र शास्त्री मयंक’ की  दो पुस्तकों क्रमशः सुख का सूरज” (कविता संग्रह) एवं नन्हें सुमन (बाल कविता का संग्रह) का लोकार्पण समारोह एवं ब्लॉगर्स मीट के सीधे प्रसारण से किया गया. जिसमें  किसी भी हिंदी ब्लॉगर सम्मलेन और संगोष्ठी के लिए यह प्रथम अवसर था जिसका जीवंत प्रसारण अंतर्जाल के माध्यम से किया हो. समारोह का जीवंत प्रसारण पूरे समारोह के दौरान खटीमा से पद्मावलि ब्लॉग के पद्म सिंह और अविनाश वाचस्पति के साथ  जबलपुर से मिसफिट-सीधीबात  ब्लॉग के संचालक यानी  मैने किया . बस फ़िर क्या था सिलसिला जारी रहा बीसीयों टाक-शो, साक्षात्कार के साथ साथ दिल्ली से 30 अप्रैल 2011 के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया. यह प्रयोग सर्वथा प्रारम्भिक एकदम कौतुकपूर्ण  प्रदर्शन था लोग जो हिंदी ब्लागिंग के लिये समर्पित हैं उनको यह क़दम बेहद रुचिकर लगा.
 वेबकास्टिंग क्या है ?
वेबकास्टिंग किसी भी घटना का सीधा अथवा रिकार्डेड  प्रसारण है जो थ्री-जी तक़नीकी के आने के पूर्व यू-ट्यूब, ustream, अथवा बैमबसर, जैसी साइट्स के ज़रिये सम्भव थी. आप इसके ज़रिये घटना को रिकार्ड कर लाईव अथवा रिकार्डेड रूप में अंतरजाल पर अप-लोड कर सकतें हैं.
  इसके लिये आप http://bambuser.com/  अथवा www.ustream.tv पर खाता खोल के जीवंत कर सकते हैं उन घटनाओं को आपके इर्द गिर्द घटित हो रहीं हों. इतना ही नहीं इस तक़नीकी के ज़रिये आप भारत में पारिवारिक एवम घरेलू आयोजनो को अपने उन नातेदारों तक भेज सकतें हैं जो कि विश्व के किसी भी कोने में हैं अपनी रोज़गारीय मज़बूरी की वज़ह से.आपसे दूर हैं . यदी भारत में नेट की स्पीड में धीमापन खत्म हुआ तो वेबकास्टिंग आने वाले समय में व्यवसायिक स्वरूप ले सकती . आम इन्सान अपने वैवाहिक पारिवारिक समारोहों में विश्व में बसे अपने नाते-रिश्तेदारों तक सजीव प्रसारण भेज सकते हैं जिसे केवल वे ही लोग देख सकते हैं जिनको आयोजक चाहें. 

4 comments:

वन्दना 18 दिसंबर 2011 को 1:27 pm  

वाह ………बहुत सुन्दर तरीके से सारी जानकारी दे दी।

शिखा कौशिक 18 दिसंबर 2011 को 8:52 pm  

bahut achchhi takniki jankari preshit ki hai aapne .aabhar .

Atul Shrivastava 18 दिसंबर 2011 को 10:18 pm  

बढिया जानकारी।
छत्‍तीसगढ में भी एक ब्‍लागर हैं जो इस तरह का ब्‍लाग संचालित करती हैं।
आप संज्ञा टंडन जी के ब्‍लाग बोलते शब्‍द पर भी ब्‍लाग पोस्‍ट पढ और सुन सकते हैं।

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