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ग़ज़लगंगा.dg: कौन किसकी पुकार पर आया

रविवार, 27 मई 2012

कौन किसकी पुकार पर आया.
जो भी आया करार पर आया.

तेज़ रफ़्तार कार पर आया.
कौन गर्दो-गुबार पर आया?

सबकी गर्दन को काटने वाला 
आज चाकू की धार पर आया.

जो छपा था महज़ दिखावे को 
मैं उसी इश्तेहार पर आया.

शाख दर शाख कोपलें फूटीं 
खुश्क जंगल निखार पर आया.

उसने दोजख से इक उछाल भरी 
और जन्नत के द्वार पर आया.

एक सौदा निपट गया गोया 
लाख मांगा हज़ार पर आया.

सबके तलवे लहूलुहान मिले 
कौन फूलों के हार पर आया?

जीत पर उतना खुश नहीं था मैं 
जो मज़ा उसकी हार पर आया.

एक तूफ़ान थम गया गौतम 
एक दरिया उतार पर आया.

----देवेंद्र गौतम 

2 comments:

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी 27 मई 2012 को 10:01 pm  

उम्दा शेर... बहुत अच्छी ग़ज़ल...बहुत बहुत बधाई...

dheerendra 27 मई 2012 को 11:35 pm  

लाजबाब शेर,,, बेहतरीन गजल के लिये बधाई,,,,,

RECENT POST ,,,,, काव्यान्जलि ,,,,, जिस्म महक ले आ,,,,,

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