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आँखों में देखो

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011



कहाँ कहाँ मुझे ढूंढते फिरोगे ?
आसान नहीं सत्य को ढूंढना
पाँव ज़ख़्मी हो जायेंगे
दिल दिमाग केन्द्रित हो जायेंगे
और मेरे सिवा कुछ नज़र नहीं आएगा !
मैं तुम्हारी ज़िन्दगी का अहम् बिंदु
या पड़ाव
हूँ ही नहीं
प्रश्न और उत्तर खुद में ढूंढना उचित होगा
तर्क के रास्ते में
कभी ये कभी वो नहीं होता
और तुम खामखाह
मेरे पीछे भागने लगे हो !

भागना कैसा
मैं तो हमेशा से हूँ
और सत्य से भागना मेरी नियति नहीं
कहीं अन्यत्र ढूँढने से बेहतर है
मेरी आँखों में देखो -
प्रश्न उठाने का सामर्थ्य है तो उठाओ
तुम्हें हमेशा जलतरंग सी मीठी ध्वनि सुनाई देगी
जीने का अर्थ मिलेगा
... परोक्ष में संभावनाएं मत ढूंढो
कल्पनाओं को गलत विस्तार न दो
क्योंकि मैं यदि मातृ रूप हूँ
तो शक्ति रूप भी हूँ !

13 comments:

अरुण चन्द्र रॉय 21 फ़रवरी 2011 को 12:26 pm  

नारी की शक्ति से परिचय कराती रचना.. हुंकार से भरी

सदा 21 फ़रवरी 2011 को 12:33 pm  

परोक्ष में संभावनाएं मत ढूंढो
कल्पनाओं को गलत विस्तार न दो
क्योंकि मैं यदि मातृ रूप हूँ
तो शक्ति रूप भी हूँ !
गहन भावों का समावेश हर शब्‍द में ...हर पंक्ति बहुत बहुत कुछ कहती हुई, अनुपम प्रस्‍तुति ।

रवीन्द्र प्रभात 21 फ़रवरी 2011 को 12:40 pm  

आत्मसाक्षात्कार कराती हुयी खुबसूरत रचना !

मनोज पाण्डेय 21 फ़रवरी 2011 को 12:42 pm  

कहाँ कहाँ मुझे ढूंढते फिरोगे ?
आसान नहीं सत्य को ढूंढना
पाँव ज़ख़्मी हो जायेंगे
दिल दिमाग केन्द्रित हो जायेंगे
और मेरे सिवा कुछ नज़र नहीं आएगा !
मैं तुम्हारी ज़िन्दगी का अहम् बिंदु
या पड़ाव
हूँ ही नहीं
प्रश्न और उत्तर खुद में ढूंढना उचित होगा
तर्क के रास्ते में
कभी ये कभी वो नहीं होता
और तुम खामखाह
मेरे पीछे भागने लगे हो !

हर पंक्ति कुछ कहती हुयी....

Minakshi Pant 21 फ़रवरी 2011 को 12:59 pm  

नारी को बखूबी परिभाषित करती रचना |
बहुत खुबसूरत रचना |

ब्रजेश सिन्हा 21 फ़रवरी 2011 को 1:45 pm  

बहुत सुंदर सचित्र नारी की परिभाषा आभार !

संगीता स्वरुप ( गीत ) 21 फ़रवरी 2011 को 3:48 pm  

कहीं अन्यत्र ढूँढने से बेहतर है
मेरी आँखों में देखो -
प्रश्न उठाने का सामर्थ्य है तो उठाओ
तुम्हें हमेशा जलतरंग सी मीठी ध्वनि सुनाई देगी

नारी के सत्य रूप को बताती सुन्दर रचना

निर्मला कपिला 22 फ़रवरी 2011 को 9:38 am  

परोक्ष में संभावनाएं मत ढूंढो
कल्पनाओं को गलत विस्तार न दो
क्योंकि मैं यदि मातृ रूप हूँ
तो शक्ति रूप भी हूँ !
नारी की सही परिभाशा। बधाई इस रचना के लिये।

जेन्नी शबनम 23 फ़रवरी 2011 को 8:20 am  

परोक्ष में संभावनाएं मत ढूंढो
कल्पनाओं को गलत विस्तार न दो
क्योंकि मैं यदि मातृ रूप हूँ
तो शक्ति रूप भी हूँ !

bahut sachchi aur sahi baat. sundar rachna, badhai.

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