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बै नी आ ह पी ना ला

शुक्रवार, 18 मार्च 2011



बै नी आ ह पी ना ला
इन्द्रधनुषी सात रंग
टंग गए आकाश में
छलका प्रेम का रंग
मिलके सातों रंग में
बजी बांसुरी फागुनी
नाचे बरसाने की राधा
एक चुटकी रंग में
गोकुळ बन बैठा राधा

4 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) 19 मार्च 2011 को 1:27 pm  

बजी बांसुरी फागुनी
नाचे बरसाने की राधा
एक चुटकी रंग में
गोकुळ बन बैठा राधा

इन्द्रधनुषी रंग छा गए ..

सदा 19 मार्च 2011 को 3:10 pm  

एक चुटकी रंग में
गोकुळ बन बैठा राधा

वाह ...बहुत खूब ..

होली के अवसर पर बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" 20 मार्च 2011 को 3:46 pm  

वाह ... आपने तो भक्ति का सही स्वरुप दिखा दिया ... सब प्रेममय हो गया ...

वाणी गीत 21 मार्च 2011 को 12:16 pm  

एक चुटकी रंग में गोकुल बन बैठा राधा ...
इस रंग की ऐसी ही महिमा है !

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