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रविवार, 21 अगस्त 2011


हंसी बेशर्म है उनकी
करम बेशर्म है उनका 
वतन को बेचते हैं वो
धरम बेशर्म है उनका 
खुदी में डूब कर खुद को
खुदा ही मान बैठे जो 
बता औकात उन्हें उनकी 
कि नहीं अब वक्त है उनका

5 comments:

शालिनी कौशिक 21 अगस्त 2011 को 9:55 pm  

सुन्दर भावाभिव्यक्ति.आपको कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें
आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

रवीन्द्र प्रभात 22 अगस्त 2011 को 10:55 am  

सशक्त बिंबों से सधी हुई सुंदर कविता,आपको कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

teekay 22 अगस्त 2011 को 5:19 pm  
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
teekay 22 अगस्त 2011 को 5:20 pm  

mujhe ise istemaal karne ki ijazat dijiye,,,,,

Dr (Miss) Sharad Singh 22 अगस्त 2011 को 10:11 pm  

भावों और शब्दों का सुंदर संयोजन....

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