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शेर

मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

(1) -      रो रहा था अपने किये पर शर्मिन्दा था वो। रात लूटा था जिसे उसका अपना ही घर था वो॥(2)-  रात के डर से दिन में निकलती थी वो।लूटा किसी अपने ने भरी दुपहरी चिल्लायी है वो॥

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