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बसंत ऋतू की शुभकामनाएं...

शुक्रवार, 27 जनवरी 2012


आइये कुछ झलकियां तो देख लीजिए मित्र मेरे ब्लाग में बसंत पंचमी की...
"आप सभी को हार्दिक दिल से शुभकामनाएं बसंत पंचमी की"

साभार: गूगल वेब को चित्रों के लिए.

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मेरा दर्द....,

सोमवार, 23 जनवरी 2012


आप सभी मित्रों के लिए पेश है नए साल(2012) का मेरा पहला पोस्ट
जिसमें तो दो अलग-अलग लाइने हैं पर दोनों कविता का अर्थ और दर्द एक ही है,


(१)
मुझे उदास देख कर उसने कहा ;
मेरे होते हुए तुम्हें कोई 
दुःख नहीं दे सकता,


"फिर ऐसा ही हुआ"
ज़िन्दगी में जितने भी दुःख मिले, 
सब उसी ने दिए.....
(२)
वो अक्सर हमसे एक वादा करते हैं कि;
"आपको तो हम अपना बना कर 
ही छोड़ेंगे"
और फिर एक दिन उन्होंने अपना
वादा पूरा कर दिया,


"हमें अपना बनाकर छोड़ दिया..."


नीलकमल वैष्णव"अनिश"

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शुभकामनाएं...

बुधवार, 26 अक्टूबर 2011


!!आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं!!
HAPPY DEEPAWALI 2011

नीलकमल वैष्णव"अनीश"

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दुआ...

बुधवार, 5 अक्टूबर 2011


आप सभी को दुर्गा नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं 
और साथ ही साथ बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रतिक दशहरा पर्व की भी बधाईयां....
आप से निवेदन है कि अब मेरे दोनों ब्लाग निचे जो लिंक है वह फेसबुक पर उपलब्ध है तो मेरा आपसे अनुरोध है कि कृपया फेसबुक पर भी अनुसरण करें !! धन्यवाद !! 
http://neelkamal5545.blogspot.com/
http://neelkamalkosir.blogspot.com/


नीलकमल वैष्णव"अनीश" 

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प्रगति......

गुरुवार, 22 सितंबर 2011


प्रगति आतंक की जननी है 
खून तो मानो आतंक है 
पर प्रगति तो धमनी है 
प्रगति ने किया बंदूकों का आविष्कार 
इंसानों ने किया अपनों का ही शिकार 
प्रगति ने ही किया परमाणु अस्त्रों का आविष्कार  
जल गया हिरोशिमा नागासाकी जिसका न कोई आधार 
प्रगति अभी खोज रही थी कैंसर का उपचार 
लो आ गया नया एड्स का भरा पूरा परिवार 
प्रगति ने ही किया है वकील अदालतों का आविष्कार 
बोफोर्स, हवाला चारा करके भी बच गई सरकार 
प्रगति का सबसे बड़ा आविष्कार तो है नोटों की लम्बी तलवार 
जिससे काटो तो ना निकले खून और बचे कातिल हर बार..... 


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०५ सितम्बर शिक्षक दिवस एवं १४ सितम्बर हिंदी दिवस विशेष......

रविवार, 4 सितंबर 2011


हिंदी महिमा.....
हिंदी हिन्दुस्तानी, हिंद की ये भाषा 
इस हिंदी में छिपी हुई है, उन्नति की परिभाषा 
भारत माता की उर माला का, मध्य पुष्प है हिंदी 
माता के मस्तक पर, जैसे शोभित हो बिंदी 
यह भरती गागर में सागर, लिखता जग देख ठगा सा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
इस हिंदी में महाकाव्य रच तुलसी हुए महान 
अर्थ गंभीर ललित श्रृंगारिक, सब करते गुणगान 
नीराजन यह भूमि भारत का, जन-जन की है यह आशा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
अपनी संस्कृति अपनी मर्यादा, अपनी भाषा का ज्ञान 
यही एक पाथेय हमारा, रहे सदा यह ध्यान 
बिन इसके यदि बढ़ा कदम, हम बनेंगे जग में तमाशा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
अपनी भाषा की समर्थता से, हम सामर्थ्य बढ़ाये 
प्रगति वास्तविक है तब ही, जब सब हिंदी अपनाएं 
भारत का उत्थान है हिंदी, अमृत निर्झर झरता सा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
अपने घर में अपनी भाषा हिंदी अपमानित न होवें 
वह है अभागा अमृत पाकर कालजयी जो ना होवें 
हिंदी सेवा में जुटकर साथी, अब झटके दूर हताशा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
हिंदी पर गर्व करेंगे जब हम, देश महान बनेगा 
दिग दिगंत में व्यापित हिंदी नवल वितान बनेगा 
भारत का मान बढेगा ऐसा, होगा अम्बर झुका-झुका सा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!

आप सबको ०५ सितम्बर शिक्षक दिवस एवं
१४ सितम्बर हिंदी दिवस की अग्रिम 
ढेर सारी शुभकामनाएं !!!!

नीलकमल वैष्णव"अनिश"

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इंतज़ार........

गुरुवार, 1 सितंबर 2011


शब्द को सुन  कर ही 
लगता है लम्बा समय है 
अगर कोई किसी को इंतज़ार 
करने के लिए कहता है तो फिर 
पूछिये मत क्योंकि सभी को
मालुम है कि इंतजार की घड़ी 
कितनी लम्बी होती है ?
हर एक पल एक सदी के समान गुजरता है 
और मैंने भी तो काफी इंतज़ार किया है, 
इंतज़ार...
इस शब्द का अर्थ मुझसे 
अच्छा और कौन बता सकता है 
क्योंकि मैंने पूरी जिंदगी 
सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा 
इंतजार ही तो किया है 
पर पता नहीं यह मौत 
आजतक आई क्यों नहीं........???

नीलकमल वैष्णव"अनिश"

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कोरे सपने.......

गुरुवार, 25 अगस्त 2011



बिना तुम्हारे बंजर होगा आसमान 
उजड़ी सी होगी सारी जमीन 
फिर उसी धधकते हुए सूर्य के प्रखर तले 
सब ओर चिलचिलाती काली चट्टानों पर 
ठोकर खाता, टकराता भटकेगा समीर 
भौंहों पर धुल-पसीना ले तन-मन हारा 
बेचैन रहूंगा फिरता मैं मारा-मारा
देखता रहूँगा क्षितिजों की 
सब तरफ गोल कोरी लकीर 
फिर भी सूनेपन की आईने में  चमकेगा लगातार 
मेरी आँखों में रमे हुए मीठे आकारों का निखर 
मैं संभल न पाऊंगा डालूँगा दृष्टि जिधर 
अपना आँचल फैलायेगी वह सहज उधर.......
नीलकमल वैष्णव"अनिश"
०९६३०३०३०१०
०९६३०३०३०१७

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15 अगस्त....

सोमवार, 15 अगस्त 2011


आप सभी मित्रों को स्वतंत्रता की ६५ वीं सालगिरह 
के इस पावन अवसर की अनेकानेक बधाईयाँ
आज हमारे देश को आजाद हुए ६५ वर्ष हो गए,
पर क्या हम सचमुच सम्पूर्ण रूप से
आजाद हैं ? 

क्या यह वही भारत है जिसका सपना हमारे 
वीर सपूतों ने अपनी प्राणों की बलिदान 
देकर देखी थी ?

पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे पर आज  हम
महंगाई, भ्रष्ट नेताओं और अफसरों के
गुलाम है,


महंगाई इस कदर हमें घेर चुकी 
है जहाँ से निकालने का कोई राह दिखाई
नहीं पड़ रही है
इस महंगाई रुपी डायन का अत्याचार 
इस कदर है कि इसकी मार सभी 
वस्तुओं पर देखी जा सकती है इसकी
असर को
खैर मैंने तो आप लोगों को स्वतंत्रता दिवस 
कि बधाई देने के लिए लिखना शुरू किया 
था पर मैं भटक कर कहाँ जा रहा हूँ इस
महंगाई के फेर में ........

पर एक बात जरुर बोलूंगा कि मुझे तो पता
है की मैं भटक कर कहाँ जा रहा था पर...
क्या किसी को पता है की यह देश की 
महंगाई कहाँ और किस ओर जा रही है ???
नीलकमल वैष्णव"अनिश"
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भारत की चेतावनी.....

शनिवार, 6 अगस्त 2011

सुन ले ध्यान लगाकर पाक 
खुली रख हमेशा कान और आँख 
नहीं तो हम जलाकर कर देंगे तुझको ख़ाक 
भूल कर भी यहाँ पर कदम मत रखना 
देखा है तुमने पहले भी भारत का करिश्मा 
कश्मीर हड़पने का सपना तू छोड़ 
हम हैं, सब मिलकर पुरे सौ करोड़ 
भूलकर भी समझना मत कितनी अच्छी है कहानी 
भारत की हर जवानों की यह है जुबानी 
हमने तो समझा था पड़ोसी है पाकिस्तान 
गलती की सज़ा में हम बनायेंगे उसे कब्रिस्तान 
हमारे यहाँ पे है हमेशा शराफत का सम्मान 
इसलिए, पाक सुन भारत की चेतावनी 
समय से पहले समझ वरना आयेगा तेरे आँखों में पानी !!!

नीलकमल वैष्णव"अनिश"   

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