प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ. Blogger द्वारा संचालित.
प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है जहां आपके प्रगतिशील विचारों को सामूहिक जनचेतना से सीधे जोड़ने हेतु हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं !



एक बार फिर दहाड़ीं वसुंधरा, किरण ने भी मिलाया सुर

गुरुवार, 1 मार्च 2012


राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती वसुंधरा राजे ने एक बार फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ललकारते हुए दहाड़ लगाई। इस बार तो राजसमंद विधायक व भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने भी उनके सुर में सुर मिलाया। विधानसभा की कार्यवाही को बाधित करने में मुद्दे पर दोनों ने आरोप लगाया है कि जब भी मौजूदा सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार की बात उठाई जाती है तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उसका कोई जवाब देने की बजाय उलटे पलट कर पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप का रिकार्डर चला देते हैं। उन्होंने इसके साथ यह भी जोड़ा कि वे दरअसल ऐसा इस कारण करते हैं ताकि उनके भ्रष्टाचार पर पर्दा पड़ जाए और जनता का ध्यान हट जाए।
विधानसभा सत्र के पिछले कड़वे अनुभव को ख्याल में रखते हुए अपनी सदाशयता का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सदन को ठीक से चलने देने की इच्छुक है। यदि ऐसा मानस न होता काहे को विधायक भवानी सिंह राजावत के निलंबन को समाप्त करने का आग्रह करने स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत के घर जाती। मगर ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार सदाशयता चाहती ही नहीं।
वसुंधरा का तर्क है कि नरेगा में हो रहे भ्रष्टाचार की जानकारी सरकार को भी है, कार्यवाही भी चल रही है, ऐसे में मुख्यमंत्री को भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाब चंद कटारिया के उन सच्चे आरोपों पर उबलने की जरूरत क्या थी? वसुंधरा ने ठोक कर कहा कि गहलोत पिछले तीन साल में उन पर एक भी आरोप साबित नहीं पाए हैं, फिर भी एक ही रट लगाए हुए हैं। एक ही तरह के आरोप सुन कर लगभग उकता चुकीं वसुंधरा ने चिढ़ते हुए तल्ख स्वर में चेताया कि या तो आरोप साबित करो और जो जी में आए सजा दो, वरना जनता से माफी मांगो। इस सिलसिले में उन्होंने माथुर आयोग का भी जिक्र किया, जिसे हाईकोर्ट व फिर सुप्रीम कोर्ट ने नकार दिया। इतना ही नहीं उन्होंने चाहे जितने आयोग बनाने तक की चुनौती भी दे दी।
वसुंधरा ने एक बार फिर गहलोत को घेरते हुए कहा कि खुद उन पर ही जल महल प्रकरण, कल्पतरू कंपनी को फायदा देना, वेयर हाउस कॉर्पोरेशन को शुभम कंपनी को सौंपने और होटल मेरेडीयन को फायदा पहुंचाने संबंधी कई आरोप लगे हुए हैं, जो कि खुद उनकी ही पार्टी के नेताओं ने लगाए हैं और मीडिया ने भी उजागर किए हैं।
वसुंधरा के इन तीखे तेवरों से उत्तेजित हुईं किरण माहेश्वरी ने भी मुख्यमंत्री गहलोत की हरकत पर ऐतराज किया। वसुंधरा की पैरवी करते हुए उन्होंने कहा कि गहलोत एक भी आरोप साबित नहीं कर पाए हैं, बावजूद इसके उन्हीं आरोपों को लगा कर जानबूझ कर सदन से पलायन करने की नीति पर चल रहे हैं।
बहरहाल, भाजपा की इन दो नेत्रियों के तेवरों से साफ है कि भाजपा इस बार पूरे फॉर्म में है। उनके साफ-साफ आरोप सौ टंच सही प्रतीत होते हैं, ऐसे में जनता में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऐसी क्या वजह है कि गांधीवादी गहलोत आखिर किन मजबूरियों के चलते वसुंधरा की थप्पड़ के बाद फिर दूसरा थप्पड़ खाने को गाल आगे कर देते हैं। सीधी सीधी बात है वे किन कारणों से वसुंधरा पर लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर पा रहे हैं। चलो माथुर आयोग तो कानूनी पेचों में उलझ गया, मगर यदि भाजपा के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार को साबित करने के और रास्ते भी निकाले जा सकते थे।
यहां उल्लेखनीय है कि वसुंधरा के तेवरों के आगे गहलोत की ढ़ीले-ढ़ाले व्यक्तित्व को लेकर कांग्रेसियों को भी बड़ी भारी तकलीफ है। पिछले दिनों पूर्व उप प्रधानमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी की जनचेतना यात्रा के राजस्थान दौरे के दौरान वसुंधरा को घेरने के लिए गहलोत के इशारे पर कांग्रेस ने भ्रष्टाचार से जुड़े दस सवाल दागे थे, जो पूर्व में भी कई बार दागे जा चुके हैं। अर्थात कांग्रेस ने वे ही बम फिर छोडऩे की कोशिश की, जो कि पहले ही फुस्स साबित हो चुके हैं। वे सवाल खुद ही ये सवाल पैदा कर रहे थे कि उनमें से एक में भी कार्यवाही क्यों नहीं हो पाई है, जबकि अब तो सरकार कांग्रेस की है। प्रतिक्रिया में न केवल भाजपा ने पलटवार किया और मौजूदा कांग्रेस सरकार के तीन साल के कामकाज पर सवाल उठा दिए, अपितु पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी दहाड़ीं थीं।
सरकार की यह हालत देख कर खुद कांग्रेसी नेताओं को बड़ा अफसोस है कि गहलोत इस मोर्चे पर पूरी तरह से नकारा साबित हो गए हैं। उन्हें बड़ी पीड़ा है कि वे वसुंधरा को घेरने की बजाय खुद ही घिरते जा रहे हैं।
हालांकि यह भी सही है कि वसुंधरा जिस तरह से अपने आप को निर्दोष बताते हुए दहाड़ रही हैं, जनता उन्हें उतना पाक साफ नहीं मानती। भाजपा राज में हुए भ्रष्टाचार को लेकर आम जनता में चर्चा तो खूब है, भले ही गहलोत उसे साबित करने में असफल रहे हों। साथ ही यह भर कड़वा सच है कि जनता की नजर में भले ही वसुंधरा की छवि बहुत साफ-सुथरी नहीं हो, मगर कम से कम गहलोत तो उनके दामन पर दाग नहीं लगा पाए हैं। देखते हैं इस बार वसुंधरा की थप्पड़ खा कर गहलोत का खून खौलता है या नहीं। या फिर नींद में से उठ कर पानी पी के सो जाएंगे।

-tejwanig@gmail.com

एक टिप्पणी भेजें

www.hamarivani.com

About This Blog

भारतीय ब्लॉग्स का संपूर्ण मंच

join india

Blog Mandli
चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी
apna blog

  © Blogger template The Professional Template II by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP